
14वीं सदी के एक सूफी संत और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ी यह दरगाह ऐतिहासिक रूप से साझा उपासना स्थल रही है। हालांकि, 2022 में दरगाह पर धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद होने पर तनाव बढ़ गया, जिससे सांप्रदायिक अशांति फैल गई।

14वीं सदी के एक सूफी संत और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ी यह दरगाह ऐतिहासिक रूप से साझा उपासना स्थल रही है। हालांकि, 2022 में दरगाह पर धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद होने पर तनाव बढ़ गया, जिससे सांप्रदायिक अशांति फैल गई।