तिब्बती समाज के प्रमुख व्यक्तित्व और 14वें दलाई लामा के बड़े भाई ग्यालो थोंडुप का शनिवार को कलिम्पोंग स्थित उनके निवास पर 97 साल की उम्र में निधन हो गया। आधुनिक तिब्बती इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले थोंडुप का जन्म 5 नवंबर 1928 को हुआ था। ग्यालो थोंडुप ने अपना पूरा जीवन तिब्बती संस्कृति के संरक्षण और विकास में समर्पित कर दिया। वे दलाई लामा के अनौपचारिक दूत के रूप में भी कार्य करते थे। उनका जीवन ज्ञान, करुणा और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता था। दलाई लामा के प्रति उनका समर्पण और निष्ठा हमेशा अटूट रही। उनके निधन से तिब्बती समाज में गहरा शोक है। उनके अनुयायियों का मानना है कि उनके द्वारा स्थापित आदर्श और मूल्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे। थोंडुप ने 8 फरवरी को अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु से न केवल तिब्बती समाज बल्कि पूरे बौद्ध समुदाय को एक अपूरणीय क्षति हुई है।

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