65 वर्षीय पांडुरंग तात्या के लिए कोल्हापुर की सड़कों के गड्ढे जीवन रक्षक साबित हुए। हार्ट अटैक से मौत के बाद पांडुरंग के शव को एम्बुलेंस से घर ले जाया जा रहा था, तभी अचानक सड़क के गड्ढे से एंबुलेंस बुरी तरह टकरा गई और उनके शरीर में हलचल होने लग गई।


65 वर्षीय पांडुरंग तात्या के लिए कोल्हापुर की सड़कों के गड्ढे जीवन रक्षक साबित हुए। हार्ट अटैक से मौत के बाद पांडुरंग के शव को एम्बुलेंस से घर ले जाया जा रहा था, तभी अचानक सड़क के गड्ढे से एंबुलेंस बुरी तरह टकरा गई और उनके शरीर में हलचल होने लग गई। 

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