फुटपाथ पर बैठे 90 वर्षीय वृद्ध बताते हैं कि गाड़ी और खिलौने बेचना उनका पेशा नहीं बल्कि मजबूरी है। खिलौनों की बिक्री न होने पर कभी-कभी उन्हें भूखा ही सोना पड़ता है लेकिन इस उम्र में भी उनके अंदर जीने और संघर्ष करने का आत्मविश्वास उन्हें टूटने नहीं देता है।


फुटपाथ पर बैठे 90 वर्षीय वृद्ध बताते हैं कि गाड़ी और खिलौने बेचना उनका पेशा नहीं बल्कि मजबूरी है। खिलौनों की बिक्री न होने पर कभी-कभी उन्हें भूखा ही सोना पड़ता है लेकिन इस उम्र में भी उनके अंदर जीने और संघर्ष करने का आत्मविश्वास उन्हें टूटने नहीं देता है। 

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