पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि बचपन में तीन दिन तक उनके खाने का पता नहीं रहता था। पारलेजी के एक बिस्किट से समय निकलता था। छत टपकती थी तो उनकी मां पलंग के नीचे उन्हें सुला देती थीं।


पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि बचपन में तीन दिन तक उनके खाने का पता नहीं रहता था। पारलेजी के एक बिस्किट से समय निकलता था। छत टपकती थी तो उनकी मां पलंग के नीचे उन्हें सुला देती थीं। 

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