शिमला में सीटू मजदूर यूनियन ने नीरथ, रामपुर, झाकड़ी और बायल में धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने आउटसोर्स, कैज़ुअल, मल्टीपर्पज व फिक्स्ड टर्म कर्मियों की मांगों को लेकर रोष जताया। उन्होंने कहा कि कम वेतन पर 12 घंटे कार्य करवाया जा रहा। सीटू जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा, सचिव अमित ने कहा कि ठेका, आउटसोर्स, कैजुअल भर्ती में एक ओर राजनीतिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों व कंपनियों की कमीशनखोरी बढ़ी है, तो दूसरी ओर इन कर्मचारियों पर शोषण का शिकंजा मजबूत हुआ है। इन कर्मचारियों का भारी शोषण ही रहा है। कर्मचारियों से 8 के बजाय 12 घंटे कार्य लिया जाता है। उन्होंने कहा कि पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, पेंशन, बोनस आदि की सुविधा लागू नहीं की जाती है। इनके लिए मेडिकल सुविधा कर कोई प्रावधान नहीं है। इन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिलता है। कई बार महीनों के उपरान्त यह वेतन मिलता है। उन्होंने ने कहा कि लगभग 30 हजार आउटसोर्स, हजारों ठेका कर्मी, मल्टीपर्पज, फिक्स्ड टर्म कर्मी राज्य सेवाओं में कार्यरत हैं। प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों व सेवाओं में मल्टी टास्क, माल्टी पर्पज के आधार पर कर्मियों को न्यूनतम वेतन से भी बेहद कम 4500 से लेकर 6 हजार रुपए पर नियुक्त करना उसके शोषणकारी चरित्र को दर्शाता है। सीटू जिला अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश, जिला व ब्लॉक स्तर पर मजबूत संगठन बनाकर प्रदेश सरकार की ठेका, आउटसोर्स ,कैज़ुअल, मल्टीपर्पज व फिक्स टर्म कर्मचारी विरोधी नीतियों का करारा जवाब देंगे। अपने अधिकारों के लिए लड़ाई तेज़ करेंगी।

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