हिमाचल प्रदेश के शिमला में पुलिस ने ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ किया। सेब का एक व्यापारी बड़ी चालाकी के साथ पिछले 5-6 सालों से ड्रग्स का एक पूरा रैकेट चला रहा था। पुलिस को जब इसके बारे में जानकारी मिली तो नशा तस्कर के जाल को जानकर दंग रह गए। आरोपी पूरा रैकेट वॉट्सऐप के जरिए चलाता था, लेकिन डिलीवरी करने वाले शख्स और नशा खरीदने वाला व्यक्ति कभी एक-दूसरे से नहीं मिलते थे। पुलिस के मुताबिक ड्रग्स की मांग वॉट्सऐप पर होती थी। ये लोग पहले सुनिश्चित करते थे कि ड्रग्स के वितरण से पहले यह चार हाथों से गुजरे। उन्होंने मांग लाने, ड्रग्स की आपूर्ति करने और भुगतान प्राप्त करने के लिए अलग-अलग अप्रत्याशित लोगों को नियुक्त करते थे । एक-दूसरे से नहीं मिलते थे आरोपी अधिकारी ने बताया कि आरोपी कभी भी खुद किसी भी साझेदार के साथ सीधे संपर्क में नहीं आते थे। डिलीवरी करने वाला व्यक्ति ड्रग को एक अलग स्थान पर रखता और खरीदार को वहां से उठाने के लिए एक वीडियो साझा करता था। पैसे भी अलग-अलग खातों से होते हुए नेगी के खाते में पहुंचते थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले 15 महीनों में आरोपियों के बैंक खातों में ढाई से तीन करोड़ रुपए के फंडफ्लो का पता चला है। नाइजीरियन व हरियाणा के गैंग से संपर्क एसपी संजीव कुमार गांधी ने बताया कि शिमला का एक सेब व्यापारी जिसका नाम शाही महात्मा (शशि नेगी) है। वह पिछले पांच-छह वर्षों से एक अंतरराज्यीय ‘चिट्टा’ रैकेट चला रहा था। इसके दिल्ली में नाइजीरियन ड्रग गैंग और हरियाणा के अन्य गैंग के साथ संपर्क था। उन्होंने कहा कि उसका कश्मीर में भी कुछ लोगों के साथ संपर्क था। उन्होंने बताया कि उसने इस रैकेट को इतनी कड़ियों में बांट रखा था कि उसे यकीन था कि पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकती है। लेकिन 20 सितंबर को उसे उस वक्त झटका लगा जब पुलिस ने शिमला में इस साल की सबसे बड़ी ड्रग्स की जब्ती की। पुलिस को इस दौरान 465 ग्राम ‘चिट्टा’ मिला।

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