हिमाचल सरकार ने विवादित IAS अफसर राम सुभग सिंह को फिर से सेवा विस्तार दिया है। जिस IAS को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पत्र पर मुख्य सचिव पद से हटाया गया था, कांग्रेस सरकार ने उन्हीं IAS को एक-दो नहीं बल्कि तीसरी बार सेवा विस्तार दिया है। इस बार मेहरबानी 6 महीने, साल को नहीं, पूरे 2 साल के लिए की गई। हैरानी इस बात की है कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने 1987 बैच के IAS राम सुभग सिंह को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। खासकर जब PMO के आदेशों पर रातों रात पूर्व जयराम सरकार ने राम सुभग सिंह को पद से हटाया था। तब कांग्रेस ने सरकार और अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े थे। अब उन्हीं अफसर को मौजूदा सरकार ने प्रिंसिपल एडवाइजर टू CM लगाया है। 1.50 लाख सैलरी और भत्ते मिलेंगे हिमाचल के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने राम सुभग सिंह के सेवा विस्तार से जुड़ी अधिसूचना बीती शाम को जारी कर दी है। इसके मुताबिक राम सुभग को प्रतिमाह 1,50,000 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले टीए/डीए को लेने के भी वह हकदार होंगे। राम सुभग को रिटायरमेंट पर मिलने वाली मेडिकल और सरकारी आवास की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। पुन: रोजगार नहीं सेवा विस्तार देकर मेहरबानी आर्थिक तंगहाली झेल रही रही सरकार आमतौर पर सेवा विस्तार देने से बचती है, क्योंकि सेवा विस्तार में लगभग पूरा वेतन देने पड़ता है। यदि किसी रिटायर अफसर की सेवाएं लेनी जरूरी हो तो सरकार पुन: रोजगार देती है। पुन: रोजगार की सूरत में सैलरी आधी होती है। राम सुभग का विवादों से रहा नाता पूर्व जयराम सरकार के कार्यकाल में अगस्त 2019 में राम सुभग सिंह अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) थे। जयराम सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के लिए पर्यटन विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया। तब राम सुभग पर्यटन विभाग के ACS थे। उस पोर्टल पर एक विवादित डॉक्यूमेंट अपलोड हो गया, वो डॉक्यूमेंट लैंड सीलिंग एक्ट से जुड़ा हुआ था। विवादित डॉक्यूमेंट अपलोड होने से जुड़ा खुलासा हुआ तो जयराम सरकार पर दबाव पड़ा। उसके बाद जयराम सरकार ने अगस्त 2019 में राम सुभग से पर्यटन विभाग वापस ले लिया। अक्टूबर 2019 में ही राम सुभग सिंह को आयुर्वेद विभाग भी दिया गया, लेकिन 5 दिन बाद ही ये विभाग भी उनसे वापस ले लिया गया। PMO के आदेशों पर हटाया गया अनिल खाची के बाद राम सुभग को पूर्व सरकार ने मुख्य सचिव बनाया। तब राम सुभग पर आरोप लगा कि वन विभाग के ACS रहते हुए कांगड़ा के नगरोटा सूरियां में इंटरप्रटेशन सेंटर के भवन निर्माण में भारी गड़बड़ी हुई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री को की गई। अंत में PMO के आदेशों पर उन्हें कार्यकाल पूरा किए बगैर मुख्य सचिव पद से हटाना पड़ा। चहेतों पर सरकार मेहरबान हिमाचल सरकार न केवल राम सुभग बल्कि दूसरे चहेते अधिकारियों को भी पुन: रोजगार और सेवा विस्तार देने से बाज नहीं आ रही। बीते दिनों शिमला में बेरोजगार भी इसे लेकर कांग्रेस सरकार को चेता चुके हैं। मगर सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। पुन: रोजगार और सेवा विस्तार की वजह से राज्य के 8 लाख से ज्यादा बेरोजगार परेशान है।

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