हिमाचल प्रदेश के रेस्टोरेंट, फास्ट-फूड सेंटर और रेहड़ी-फड़ी में पहचान पत्र (I-CARD) लगाने के मामले में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा, इसका उत्तर प्रदेश या योगी आदित्यनाथ से कोई लेना-देना नहीं है। हिमाचल प्रदेश एक अलग प्रांत है। राज्य के अपने अलग मुद्दे है। दिल्ली में गुरुवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, हाल के दिनों में हुई घटनाओं को देखते हुए आपसी सौहार्द और शांति बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने कुछ कदम उठाए है। इसी मकसद से सर्वदलीय कमेटी भी गठित की गई है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा, हाईकोर्ट की डायरेक्शन पर अलग अलग नगर निकाय में पहले ही स्ट्रीट वेडिंग कमेटी भी बनी हुई है। इनके लिए अलग अलग जोन चिन्हित किए जा रहे हैं। विक्रमादित्य ने कहा कि हिमाचल में बीते दिनों के घटनाक्रम को सांप्रदायिकता का रंग देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ऐसा कोई नहीं है। राजीव शुक्ला ने भी सफाई दी हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी राजीव शुक्ला ने भी इस पर सफाई देते हुए कहा कि इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। हिमाचल सरकार का ऐसा कोई आदेश नहीं है। उन्होंने कहा, विधानसभा अध्यक्ष ने स्ट्रीट वेंडर की समस्या के समाधान को एक कमेटी बनाई है, जो समाधान निकालेगी कि कैसे रेहड़ी वालों को बिठाया जाए। इसलिए यूपी से तुलना करना गलत है। विक्रमादित्य को क्यो देनी पड़ी सफाई बीते कल विक्रमादित्य सिंह ने उतर प्रदेश की तर्ज पर प्रदेश में भी रेहड़ी-फड़ी वालों को उनकी फोटो लगे लाइसेंस देने और इन्हें दुकानों के बाहर अनिवार्य करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर हिमाचल में भी पहचान पत्र अनिवार्य किए जाएंगे। कांग्रेस बेकफुट पर आई इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस सरकार पर यूपी की योगी सरकार की योजनाएं लागू करने के आरोप लग रहे हैं। विक्रमादित्य के इस बयान के बहाने बीजेपी सवाल उठा रही है कि कावड़ यात्रा के दौरान जब योगी सरकार ने पहचान पत्र लगाना अनिवार्य किया था, तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया। मगर कांग्रेस सरकार के मंत्री खुद आईकार्ड लगाने की बात कर रहे हैं। अगर यूपी में आईकार्ड लगाना गलत था तो हिमाचल में सही कैसे हो सकता है। बीजेपी इस तरह के सवाल पूछ रही है। इससे कांग्रेस भी बेकफुट में आ गई। लिहाजा विक्रमादित्य सिंह और राजीव शुक्ला ने आज इस पर सफाई दी है।