शिमला के उपनगर संजौली में मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद अब 28 सितंबर को हिंदू संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन की कॉल दे चुके हैं। इससे पहले शिमला में विभिन्न संगठनों ने 27 सितंबर को सद्भावना मार्च का आह्वान किया है। इस आह्वान में लेफ्ट संगठनों के साथ-साथ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी शामिल होगी। शिमला में शांति को लेकर सद्भावना मार्च निकालने की अपील करते हुए संजय चौहान पूर्व महापौर नगर निगम शिमला व CPIM जिला सचिव ने कहा कि बीते कुछ दिनों से हिमाचल प्रदेश और शिमला में आपसी भाईचारे और सौहार्द के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई थी, जिसकी वह निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि शिमला में पीस एंड हार्मनी के लिए आज सभी संगठन एक साथ आए हैं। बीते कुछ दिनों से शिमला में सांप्रदायिकता के नाम पर आपसी मेल-झोल और सौहार्दपूर्ण माहौल को खराब करने की कोशिश की गई है। ऐसे में शहर की जनता से अपील है कि वह सौहार्दपूर्ण माहौल शहर का बनाए रखें। विभिन्न संगठनों ने एक सुर में कहा कि संविधान में देश के सभी नागरिकों को आजादी से आने-जाने और व्यापार करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। सालों से शिमला में बाहरी लोगों का आना-जाना लगा रहा है। शिमला में आज शांति का माहौल खराब करने का काम किया जा रहा
उन्होंने कहा कि शिमला में आज शांति का माहौल खराब करने का काम किया जा रहा है। इन लोगों का काम केवल ध्रुवीकरण का है और शिमला में भी उसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। शिमला से देश भर में बड़ा संदेश जा रहा है। जिसे बदलने की जरूरत है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जिस तरह के बयान लगातार आ रहे हैं उसे रोकने की जरूरत है। साथ ही संगठनों ने नकली आधार कार्ड बनाने की बात को भी गलत और भड़काऊ बताया है। उन्होंने कहा कि समाज में तरह-तरह के तत्व होते हैं। बाहर से जो गलत मंशा लेकर आ रहे हैं उन लोगों पर कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन शहर में सौहार्द का माहौल और आपसी भाईचारा बना रहना चाहिए।