लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हिमाचल प्रदेश की मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना की प्रशंसा की है। उन्होंने हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इस योजना के प्रति अपनी सराहना व्यक्त करते हुए एक पत्र भेजा है। राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि इस प्रकार की योजनाएं देश के भविष्य को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उन्होंने इसके लिए हिमाचल सरकार की सराहना की है। राहूल गांधी ने अपने पत्र में लिखा कि भारत में बच्चों में प्रोटीन कुपोषण एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश सरकार की सराहना करना चाहूंगा कि उसने सप्ताह में एक बार उबले अंडे/फल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना शुरू की है। उन्होंने सीएम सुक्खू को लिखे पत्र में कहा किन प्रोटीन का सेवन बढ़ाने के लिए, राज्य सरकार छात्रों की आहार संबंधी प्राथमिकताओं के अनुसार अधिक बार उबले अंडे या प्रोटीन के अन्य स्रोत उपलब्ध कराने पर विचार कर सकती है। योजना में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की व्यवस्था बढ़ाए उन्होंने कहा कि देश मे सभी सरकारों को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चों को स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार ताज़ा पका हुआ भोजन मिले । इससे एमडीएम योजना में समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित होती है। गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इस सन्दर्भ में, मैं हिमाचल प्रदेश सरकार से अनुरोध करना चाहूंगा कि वह प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की व्यवस्था बढ़ाए और यह सुनिश्चित करे कि ऑन-साइट एमडीएम खाना पकाना जारी रहे। मुझे पूरा विश्वास है कि हिमाचल प्रदेश पौष्टिक रूप से संतुलित आहार उपलब्ध कराने में अग्रणी रहेगा। योजना की सफलता देख सरकार विस्तार की तैयारी मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना की सफलता को देखते हुए। हिमाचल सरकार अब इस योजना का विस्तार करने जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस विस्तार के लिए एक विशेष प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट में स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को भी शामिल किया जाएगा। योजना के विस्तार के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं, और तीन साल तक के बच्चों को भी शामिल किया जाएगा। ये है हिमाचल सरकार की बाल पौष्टिक आहार योजना हिमाचल प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना की शुरुआत की गई थी, जिसकी घोषणा सीएम सुक्खू ने अपने पिछले बजट में की थी। इस योजना के तहत राज्य की सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के दौरान बच्चों को सप्ताह में एक दिन अंडा या फल देने का प्रावधान है। इन फलों में सेब या केला दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के पौषण में सुधार करना और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को बेहतर बनाना है। हिमाचल सरकार अब इस योजना के विस्तार के लिए भी तैयार हो रही है, जिससे कि इसका लाभ और अधिक लोगों तक पहुंच सके। विस्तारित योजना में गर्भवती महिलाओं और धात्री महिलाओं के लिए भी विशेष प्रावधान किए जाएंगे, जिससे कि न केवल बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हो सके, बल्कि माताओं की सेहत का भी ध्यान रखा जा सके।इस तरह की योजनाओं से स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश सरकार बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और उनके समग्र विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है।