मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी घर पर अकेले थे। जब सुबह फूलवाला फूल देने पहुंचा तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। गांव के लोगों ने फोन लगाया तो फोन का जवाब भी नहीं मिला। तब गांववालों ने खिड़की से झांककर देखा तो अंदर जीतन सहनी का शव पड़ा था।


मुकेश सहनी के पिता जीतन सहनी घर पर अकेले थे। जब सुबह फूलवाला फूल देने पहुंचा तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। गांव के लोगों ने फोन लगाया तो फोन का जवाब भी नहीं मिला। तब गांववालों ने खिड़की से झांककर देखा तो अंदर जीतन सहनी का शव पड़ा था। 

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