हिमाचल प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों पर उप चुनाव के नतीजों से सरकार को खतरा नहीं है। मगर यह तय है कि सत्तारूढ़ दल की जीत हुई तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कांग्रेस में सियासी कद बढ़ेगा। कांग्रेस हारी तो सीएम सुक्खू को इसका जिम्मा लेना होगा। इससे बीजेपी और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर मजबूत नेता के तौर पर उभरेंगे। प्रदेश की सियासत में होलीलॉज खेमा पहले ही लोकसभा चुनाव में विक्रमादित्य सिंह की हार के बाद कमजोर पड़ गया है। वहीं छह में चार सीटें जून में हुए उपचुनाव में जीतकर सुक्खू मजबूत हुए हैं। अब तीन सीटों की जीत सुक्खू को ओर मजबूती देगी। इसलिए यह लड़ाई साख बचाने की है। खासकर देहरा विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, क्योंकि यहां मुख्यमंत्री की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव लड़ रही हैं। देहरा में इस वजह से होशियार बनाम सीएम सुक्खू मुकाबला कांग्रेस ने देहरा में स्थानीय नेता डॉ. राजेश का टिकट काटकर हमीरपुर जिला के नादौन से संबंध रखने वाली सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर को प्रत्याशी बनाया है। इस वजह से देहरा में मुकाबला बीजेपी के होशियार सिंह बनाम कमलेश ठाकुर कम तथा होशियार बनाम सुखविंदर सुक्खू ज्यादा है। हमीरपुर सीट के नतीजे दूसरा उपचुनाव सीएम के गृह जिला हमीरपुर में है। इस सीट पर भी सीएम की साख दाव पर लगी हुई है। मुख्यमंत्री की अपने गृह जिला में हार कई सवाल खड़े करेगी। यहां पर भी जीत हुई तो सरकार पर सियासी टालने वाले सुक्खू अब कांग्रेस में सर्वमान्य नेता के तौर पर उभरेंगे। नालागढ़ में होलीलॉज की प्रतिष्ठा दांव पर उधर, नालागढ़ सीट के नतीजे ​​​​​​सीएम से ज्यादा ​होलीलॉज गुट को कमजोर व मजबूत करेंगे, क्योंकि कांग्रेस ने नालागढ़ से वीरभद्र सिंह के करीबी बावा हरदीप को मैदान में उतार रखा है। लिहाजा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री और PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने यहां बावा हरदीप की जीत के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया है। BJP की जीत से जयराम मजबूत होंगे अब बात बीजेपी की करेंगे। भारतीय जनता पार्टी की उपचुनाव में जीत से नेता प्रतिपक्ष जयराम का सियासी कद ऊंचा होगा। वहीं बीजेपी की हार हुई तो जयराम ठाकुर पर भी पार्टी के भीतर सवाल उठेंगे, क्योंकि सत्तारूढ़ कांग्रेस इन नौ उपचुनाव के लिए जयराम को ही दोषी बता चुका है। BJP की हार हुई तो नेता प्रतिपक्ष पर उठेंगे सवाल राज्यसभा चुनाव के दौरान सरकार पर जो संकट आया था, यह सब सरकार को गिराने के लिए किया गया। जयराम ठाकुर बार बार सरकार बनाने के दावे कर रहे थे। सरकार पर संकट तो छह विधानसभा उपचुनाव के नतीजे पहले ही टाल चुके हैं। अब लड़ाई मजबूती की है। चाहे वो मजबूती विधानसभा में विधायकों के संख्या बल की हो या फिर मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की अपना कद बढ़ाने की हो।

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