हिमाचल में क़ुदरत की मार से हर साल सेब उत्पादन गिरता जा रहा है। सेब के अधीन क्षेत्र में बढ़ोतरी के बावजूद प्रोडक्शन कम हो रहा है। इस बार भी बागवानी विभाग ने 2.81 करोड़ पेटी सेब होने का पूर्वानुमान लगाया है। प्रदेश में सेब की खेती 1.15 लाख हैक्टेयर एरिया में हो रही है। साल 2009-10 में सेब के अधीन 99564 हैक्टेयर एरिया था, उस दौरान 5 करोड़ 11 लाख पेटी सेब हुआ था। साल 2022-23 में सेब के अधीन एरिया बढ़कर 1.15 लाख हैक्टेयर हो गया और उत्पादन कम होकर 2.11 करोड़ पेटी में सिमट गया। 2010 के बाद पांच करोड़ तो दूर चार करोड़ पेटी सेब उत्पादन भी नहीं हो सका। दूसरी सर्वाधिक फसल 11 साल पहले यानी 2013 में 3.69 करोड़ पेटी हुई थी। साल 2010 में हुई थी रिकॉर्ड प्रोडक्शन साल कितनी पेटी 2010 5.11 करोड़
2011 1.38 करोड़
2012 1.84 करोड़
2013 3.69 करोड़
2014 2.80 करोड़
2015 3.88 करोड़
2016 2.40 करोड़
2017 2.08 करोड़
2018 1.65 करोड़
2019 3.24 करोड़
2020 2.40 करोड़
2021 3.05 करोड़
2022 3.36 करोड़
2023 2.11 करोड़ 1134 करोड़ का वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट भी नहीं बढ़ा पाया उत्पादन सेब उत्पादन बढ़ाने के मकसद से ही 1134 करोड़ रुपए का वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट भी प्रदेश में क्रियान्वित किया जा चुका था। साल 2017 में जब यह प्रोजेक्ट मंजूर किया गया तो उस दौरान दावा किया गया कि इससे न सेब का औसत उत्पादन प्रति हैक्टेयर 8 मीट्रिक टन किया जाएगा, जो 2017 में भी औसत 6 मीट्रिक टन था। अब तक इसमें भी कोई इजाफा नहीं हो पाया। सेब उत्पादन पर मौसम की मार: डॉ. भारद्वाज बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने बताया कि सेब उत्पादन पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। पिछले कुछ सालों से सेब के लिए मौसम अनुकूल नहीं है। सर्दियों में अच्छी बर्फबारी नहीं होना, फ्लावरिंग के वक्त बारिश-बर्फवारी व ओलावृष्टि होना या सूखा पड़ना जैसे कारणों से सेब की अच्छी पैदावार नहीं हो पा रही है। बर्फबारी का ट्रेंड बदलने से फसल पर बुरा असर हिमाचल में बीते एक दशक के दौरान बर्फबारी का ट्रेंड बदला है। आमतौर पर प्रदेश में दिसंबर से 15 फरवरी के बीच बर्फबारी होती थी। मगर पिछले कुछ सालों के दौरान फरवरी से मार्च में बर्फ गिरती रही है। कई ऊंचे क्षेत्रों में तो अप्रैल में भी बर्फबारी रिपोर्ट हुई है। इसका असर सेब की खेती पर पड़ रहा है, क्योंकि मार्च-अप्रैल में बर्फ के बाद अचानक ठंड पड़ने से सेब की फ्लावरिंग प्रभावित होती है। ठंडे मौसम में मधुमक्खियां परागण नहीं कर पाती और अच्छी फ्लावरिंग भी नहीं हो पाती। इसकी मार फसल पर पड़ती है। इसके विपरीत साल दर साल सेब पर उत्पादन लागत हर साल बढ़ती जा रही है और उत्पादन कम हो रहा है। इस बार 2.91 करोड़ पेटी सेब का पूर्वानुमान: नेगी बागवानी मंत्री जगत नेगी ने कहा, इस बार 2.91 करोड़ पेटी सेब होने का पूर्वानुमान है। सेब की खेती मौसम पर निर्भर करती है। आने वाले दिनों में सेब के अच्छे साइज व रंग के लिए बारिश के साथ साथ धूप खिलना भी जरूरी है।