डॉ, रजन्ना ने 11 महीने की उम्र में पोलियो के कारण अपने हाथ और पैर दोनों गंवा दिए थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार दिव्यांग लोगों के लिए काम किया और अब उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
डॉ, रजन्ना ने 11 महीने की उम्र में पोलियो के कारण अपने हाथ और पैर दोनों गंवा दिए थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार दिव्यांग लोगों के लिए काम किया और अब उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।