हिमाचल हाईकोर्ट में आज तीन निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे मंजूर कराने के लिए स्पीकर को निर्देश देने वाली याचिका पर सुनवाई होगी। इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की बैंच में लगभग दो घंटे बहस हुई थी। आज स्पीकर के वकील द्वारा अदालत में अपनी दलीलें दी जाएगी। दरअसल, इंडिपेंडेंट MLA देहरा से होशियार सिंह, नालागढ़ से केएल ठाकुर और हमीरपुर से आशीष शर्मा ने हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है। इसलिए स्पीकर को उनका इस्तीफा स्वीकार करने के आदेश दिए जाए। इनकी याचिका पर कोर्ट ने स्पीकर को अपना जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया था। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने पिछली सुनवाई में जवाब दे दिया है। आज उनके वकील द्वारा कोर्ट में बहस की जाएगी कि उन्होंने किस वजह से इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। जनारठा ने भी दायर की कोर्ट में याचिका इस बीच निर्दलीय विधायकों के खिलाफ दो और याचिकाएं दायर कर दी गई है। शिमला शहरी से विधायक हरीश जनारठा ने हाईकोर्ट में याचिका देकर कहा कि इस मामले में फैसला देने से पहले उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए, वह इस मामले में कुछ कहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि निर्दलीय विधायकों ने जिस दबाव में अपना त्यागपत्र दिया है वह इसकी जानकारी पूरे तथ्यों के साथ न्यायालय के समक्ष पेश होकर रखना चाहते हैं। दूसरी याचिका राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्पीकर के पास दायर की है,जिसमे तीनों विधायकों को डिस्क्वालीफाइ करने की मांग की गई, क्योंकि इन्होंने इस्तीफा स्वीकार करने से पहले ही बीजेपी ज्वाइन की और एंटी डिफेक्शन लॉ का उलंघन किया है। 22 मार्च को दिया था इस्तीफा बता दें कि तीनों निर्दलीय विधायकों ने बीते 22 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया था। मगर अब तक स्पीकर ने इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विधायकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विधायकों ने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्होंने अपनी इच्छा से बिना किसी दबाव के रिजाइन किया है। इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाना चाहिए। इस बीच इन्होंने 23 मार्च को बीजेपी भी ज्वाइन कर ली। स्पीकर ने इसलिए जारी किया कारण बताओ नोटिस वहीं, स्पीकर ने दो मंत्रियों की शिकायत पर निर्दलीय विधायकों को कारण बताओ नोटिस दिया था, जिसका जवाब बीते 10 अप्रैल को तीनों विधायक स्पीकर को दे चुके हैं। इसमें विधायकों से पूछा गया था कि समय से पहले रिजाइन क्यों किया? क्या आप पर किसी प्रकार का कोई दबाव था। नेगी-रोहित ने की थी पहली शिकायत निर्दलीय विधायकों के रिजाइन के बाद राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पीकर के पास शिकायत की थी, जिसमें इन्होंने शंका जाहिर की कि 5 साल के लिए चुने गए विधायकों ने आखिर 15 महीने में ही रिजाइन क्यों किया? साथ ही शिकायत में कहा गया कि BJP ने इन्हें हेलिकॉप्टर से शिमला पहुंचाया। यही नहीं इस्तीफा देते वक्त भाजपा नेता भी साथ मौजूद रहे। क्या इन पर कोई दबाव था? इनकी शिकायत पर ही स्पीकर ने नोटिस दिया है। इस बीच विधायक हाईकोर्ट पहुंच गए। अब हाईकोर्ट इनके इस्तीफे को लेकर फैसला करेगा। निर्दलीय भी दल बदल नहीं कर सकता स्पीकर कुलदीप पठानिया कह चुके हैं कि एंटी डिफेक्शन लॉ के अनुसार, कोई भी चुना हुआ विधायक दल-बदली नहीं कर सकता। यहां तक कि पांच साल तक इंडिपेंडेंट MLA भी नहीं। यदि ऐसा करता है तो वह एंटी डिफेक्शन लॉ के प्रोविजनल को अट्रैक्ट करता है। राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ विवाद निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट दिया था। इससे बहुमत वाली कांग्रेस सरकार चुनाव हार गई। राज्यसभा चुनाव से पहले तक तीनों निर्दलीय विधायक सरकार के साथ एसोशिएट के तौर पर काम कर रहे थे। मगर राज्यसभा चुनाव के बाद इन्होंने विधायकी छोड़कर बीजेपी जॉइन की। हालांकि तीनों विधायक बिना बीजेपी जॉइन किए भी भाजपा को समर्थन दे सकते थे। मगर इन्होंने अपने पदों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने के विकल्प को बेहतर माना।

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