हिमाचल के लाहौल स्पीति जिला की ऊंची चोटियों पर बीती रात को ताजा हिमपात हुआ। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि और तूफान ने कहर बरपाया है। चिंता इस बात की है कि मौसम विभाग ने कल यानी सोमवार के लिए फिर से भारी बारिश, ओलावृष्टि और तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बीते 24 घंटे के दौरान भी रोहतांग दर्रा, लाहौल स्पीति के दारजा, सरचू इत्यादि क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी हुई। इससे मनाली-लेह नेशनल हाईवे समेत 60 सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई। वहीं मंडी और शिमला जिला के कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब को भारी नुकसान पहुंचा है। मंडी जिला की कमरुघाटी में सेब के दानों को नुकसान के साथ साथ पत्ते तक झड़ गए। उधर, शिमला जिला रामपुर की कचींण घाटी में कुरनू, नेहरा, नरैण, कड़ेली, ब्रांदली और बशड़ी सहित अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसल तो तबाह हुई है, साथ में पौधों की टहनियों तक को नुकसान हुआ है। चार दिन ऐसा रहेगा मौसम मौसम विज्ञान के अनुसार, प्रदेश में आज भी कुछेक स्थानों पर ओलावृष्टि बारिश और बर्फबारी हो सकती है। इसे देखते हुए येलो अलर्ट दिया गया है। मगर कल फिर से ऑरेंज अलर्ट बोला गया है। ऑरेंज अलर्ट ने किसानों-बागवानों को सबसे ज्यादा चिंता में डाला है। 30 अप्रैल को भी वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर पड़ेगा, लेकिन इस दिन भी कुछेक स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। एक मई के बाद मौसम साफ होने का अनुमान है। गेंहू की कटाई नहीं कर पा रहा किसान प्रदेश में गेंहू की फसल पूरी तरह पक कर तैयार है। मगर बारिश की वजह से किसान इसकी कटाई नहीं कर पा रहे हैं। जिन किसानों ने कटाई कर दी थी, उनकी फसल पर खेत में खराब होने का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि अगले दो-तीन दिन भी बारिश से राहत के आसार नहीं है। सेब बागवान बेचेन प्रदेश के अधिक ऊंचे क्षेत्रों में इन दिनों सेब की फ्लावरिंग चल रही है। ऐसे में मौसम का साफ रहना और तापमान औसत 14 डिग्री से ज्यादा रहना जरूरी है, लेकिन बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की वजह से ऊंचे क्षेत्रों का औसत पारा 14 डिग्री से काफी नीचे लुढ़क गया है। ओलावृष्टि से सेब के फूल, पत्ते और टहनियां तक को नुकसान हो रहा है। कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि के कारण सेब को ओलों से बचाने के लिए लगाए गए एंटी हेल नेट भी टूट गए है।