हिमाचल प्रदेश में नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की तलाश शुरू हो गई है। DGP की रेस में 1989 बैच के IPS एसआर ओझा का नाम सबसे आगे हैं। सीनियोरिटी को तवज्जो दी गई तो इनका DGP बनना लगभग तय है। मौजूदा DGP संजय कुंडू इसी महीने 30 तारीख को रिटायर हो रहे हैं। इसलिए नए DGP को लेकर अभी से चर्चाएं शुरू हो गई है। सूत्रों की माने तो गृह विभाग इसी हफ्ते DGP की तैनाती से जुड़ी फाइल मूव करेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से चर्चा के बाद चुनाव आयोग से नए पुलिस मुखिया की तैनाती को मंजूरी मांगी जाएगी, क्योंकि आदर्श चुनाव आचार संहिता के कारण DGP की तैनाती के लिए चुनाव आयोग की परमिशन जरूरी है। एसआर ओझा रेस में आगे फिलहाल एसआर ओझा DGP की रेस में सबसे आगे हैं। ओझा पांच महीने पहले ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटें हैं। केंद्र सरकार में वह CRPF में ADG पद पर सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में ओझा DG जेल हैं। बीते मार्च महीने में संजय कुंडू के छुट्टी पर जाने के बाद ओझा 13 दिन तक डीजीपी का अतिरिक्त कार्यभार देख चुके हैं। 1989 बैच के IPS है ओझा एसआर ओझा भी संजय कुंडू के बैच के ही है। वह मई 2025 में रिटायर होंगे। एसआर ओझा मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। ओझा के बाद सीनियोरिटी में 1990 बैच के श्याम भगत नेगी है, लेकिन नेगी अभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। उनके प्रदेश लौटने की कम संभावनाएं है। श्याम भगत नेगी के बाद 1991 बैच के डॉ. अतुल वर्मा और 1993 बैच के अनुराग गर्ग हैं। संजय कुंडू व ओझा से सीनियर IPS दिल्ली में संजय कुंडू और एसआर ओझा से सीनियर यानी 1988 बैच के IPS तपन कुमार डेका अभी दिल्ली में IB के डायरेक्टर है। मगर, वह पिछले साल रिटायर हो चुके हैं और उन्हें एक साल की एक्सटेंशन मिली है। ऐसे में ओझा के DGP बनने की चर्चा है। DGP बदलने का CM लेंगे फैसला नए DGP का फैसला मुख्यमंत्री सुक्खू पर निर्भर करेगा। अमूमन सत्ता परिवर्तन होते ही प्रमुख पदों पर सबसे पहले अधिकारी बदले जाते है। मगर CM सुक्खू ने DGP कुंडू को नहीं बदला। इसका पार्टी के लोगों ने अंदरखाते विरोध भी किया, क्योंकि कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए संजय कुंडू को पुलिस कांस्टेबल पेपर लीक का मास्टर माइंड बताया था और उन्हें पद से हटाने के लिए राजभवन के बाहर धरना भी दिया था। मगर जब कांग्रेस सत्ता में आई तो DGP को नहीं हटाया गया। ज्यादा दिन खाली नहीं रह पाएगा DGP पद संजय कुंडू के रिटायर होने के बाद लोकसभा और विधानसभा उप चुनाव के कारण DGP का पद लंबे समय तक खाली नहीं रखा जा सकता, क्योंकि चुनाव में पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए सरकार जल्द DGP की तैनाती करेगी।