हिमाचल में छोटी काशी कहे जाने वाली मंडी लोकसभा सीट पर वीरभद्र सिंह व राज परिवार का दबदबा रहा है। मंडी से 3 बार वीरभद्र सिंह और 3 बार ही प्रतिभा सिंह भी सांसद चुनी गई हैं। इसी तरह मंडी में 20 में से 14 चुनाव राज परिवारों ने जीते हैं। इसे देखते हुए कांग्रेस ने वीरभद्र-प्रतिभा के बेटे एवं PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह पर दांव खेला है। विक्रमादित्य सिंह मंडी सीट से लोकसभा चुनाव जीतते हैं तो उनकी एंट्री दिल्ली की राजनीति में हो जाएगी। मगर, उन्हें स्टेट की पॉलिटिक्स से दूर होना पड़ेगा। चुनाव में हार हुई तो वह विधायक व PWD मंत्री जरूर बने रहेंगे। मगर, यह हार उनके सियासी करियर और लोकप्रियता पर प्रश्न चिन्ह लगा देगी। जिससे वह मौजूदा CM सुखविंदर सुक्खू खेमे के आगे कमजोर साबित होंगे। वहीं BJP ने युवा एवं सेलिब्रिटी चेहरा कंगना रनोट को प्रत्याशी बनाकर ग्लैमर का तड़का लगाया है। इसलिए कांग्रेस के सामने किसी युवा चेहरे को मैदान में उतारने की चुनौती थी, जो कंगना के प्रचार और उनके बयानों का मुंहतोड़ जवाब दे सके। मसलन कंगना से मुकाबले के लिए कांग्रेस के पास विक्रमादित्य के अलावा दूसरा कोई बेहतर विकल्प नहीं था। इसी वजह से आखिरी वक्त पर विक्रमादित्य का नाम उछाला गया और सिटिंग MP प्रतिभा सिंह का टिकट काटकर विक्रमादित्य को प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस को गढ़ बचाने की चुनौती
मंडी लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। वर्ष 1952 से आज तक मंडी लोकसभा में 20 आम व उपचुनाव हुए। इनमें से कांग्रेस 15 बार चुनाव जीती, जबकि BJP केवल 4 और एक जनता दल ने चुनाव जीता है। मंडी सीट पर 2 राज परिवारों वीरभद्र सिंह और महेश्वर सिंह के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम परिवार का दबदबा रहा है। यह समीकरण भी विक्रमादित्य के टिकट की बड़ी वजह है। प्रतिभा सिंह का इसलिए कटा टिकट
प्रतिभा सिंह के मुकाबले विक्रमादित्य सिंह ज्यादा लोकप्रिय और यूथ आइकॉन है। इसके विपरीत प्रतिभा सिंह कई बार अपने बयानों की वजह से खुद और पार्टी को भी बैकफुट पर धकेलती रही हैं। 2021 में भी लोकसभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध को लेकर ऐसा बयान दे दिया था, जिससे कांग्रेस बैकफुट पर आ गई थी। तब उन्होंने कहा- ‘भाजपा ने एक फौजी को टिकट दिया है, ताकि सैनिकों के वोट मिल सकें। प्रतिभा ने कहा था कि भाजपा प्रत्याशी बार-बार कारगिल युद्ध की बात कर रहे हैं, लेकिन कारगिल में तो पड़ोसी देश की सेना को वहां से खदेड़ा गया। यह कोई बड़ी बात नहीं थी। वहां तो घुसपैठ हुई थी। यह उनकी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। प्रतिभा सिंह इस तरह के बयान कई बार देती रही है। इसलिए भी कांग्रेस ने विक्रमादित्य को बेहतर विकल्प समझा है। शिमला से विनोद सुल्तानपुरी को उतारा
वहीं शिमला लोकसभा सीट से कांग्रेस ने 6 बार के सांसद रहे केडी सुल्तानपुरी के बेटे विनोद सुल्तानपुरी को टिकट दिया है। विनोद सुल्तानपुरी वर्तमान में कसौली विधानसभा से विधायक हैं। साल 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में विनोद सुल्तानपुरी ने पूर्व मंत्री डॉ. राजीव सैजल को हराया था। भाजपा ने शिमला सीट पर सिटिंग MP सुरेश कश्यप को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस 2009, 2014 और 2019 में लगातार तीन बार शिमला सीट हार चुकी है।

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