हिमाचल प्रदेश में BJP जॉइन करने से पहले अपने पदों से इस्तीफा देने वाले 3 इंडिपेंडेंट MLA आज विधानसभा पहुंचकर विरोध जाहिर करेंगे। इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया तो नाराज विधायक विधानसभा में धरने पर बैठ सकते हैं। निर्दलीय विधायक धरने पर बैठे तो पहली बार ऐसा होगा, जब कोई इस्तीफा स्वीकार करने के लिए धरना देगा। देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और नालागढ़ से केएल ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से फिजिकली स्पीकर और विधानसभा सचिव के सामने पेश होकर इस्तीफा दिया है। अब इस्तीफा मंजूर नहीं करने का सवाल ही नहीं उठना चाहिए। इस्तीफा देने के लिए उन पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं डाला गया। होशियार ने बताया कि इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया तो तीनों निर्दलीय विधायक विधानसभा में धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। 22 मार्च को दिया था इस्तीफा देहरा विधानसभा से इंडिपेंडेंट MLA होशियार सिंह, नालागढ़ से केएल ठाकुर और हमीरपुर से आशीष शर्मा ने बीते 23 मार्च को BJP जॉइन की है। इससे एक दिन पहले तीनों दिल्ली से अचानक हेलिकॉप्टर में विधानसभा पहुंचे और स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया व विधानसभा सचिव यशपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। इनका इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं किया गया। उल्टा इनके इस्तीफे के लेकर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पीकर के पास शिकायत की है और शंका जाहिर की कि 5 साल के लिए चुने गए विधायकों ने आखिर 15 महीने में ही रिजाइन क्यों किया। क्या इन पर कोई दबाव था। मंत्रियों की शिकायत पर विधायकों को नोटिस जारी दो मंत्रियों की शिकायत के बाद स्पीकर ने तीनों निर्दलीय विधायकों को नोटिस जारी किया है। इन्हें इसका जवाब 10 अप्रैल तक देने को कहा गया है। स्पीकर ने इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया तो इनकी सीटों पर विधानसभा उप चुनाव नहीं हो पाएंगे। राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ विवाद तीनों निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट दिया था। इससे बहुमत वाली कांग्रेस सरकार चुनाव हार गई। हालांकि राज्यसभा चुनाव से पहले तीनों निर्दलीय विधायक सरकार के साथ एसोसिएट के तौर पर काम कर रहे थे। स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में इस्तीफा मंजूर करना: राज्यपाल इस बीच राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कह चुके हैं कि निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने के मामले पर वह कोई निर्देश जारी नहीं कर सकते। वह केवल सलाह दे सकते हैं, क्योंकि यह विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का मामला है। मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि तीनों निर्दलियों ने पहले इस्तीफा विधानसभा सचिव को दिया और उसके बाद अध्यक्ष को भी व्यक्तिगत तौर पर मिलकर दिया। जो इस्तीफा अध्यक्ष को दिया गया है, उसकी एक प्रति तीनों निर्दलियों ने मुझे भी दी है।

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