बीबीएमबी में हिमाचल के बिजली एरियर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रदेश में इसका श्रेय लेने की राजनीति शुरू हो गई है। पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने इस फैसले को लेकर अलग-अलग पहलुओं को सामने रखा है। जयराम ठाकुर ने इसे पिछले 30 वर्षों में प्रदेश की सभी सरकारों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा बताया, राजीव बिंदल ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल के पक्ष में फैसला आने का श्रेय तत्कालीन धूमल सरकार को दिया। तीन दशक की लड़ाई जीती जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 7.19% हिस्सेदारी को मान्यता दी थी, लेकिन संबंधित राज्य इसके बाद भी सहमत नहीं थे। तीन दशक तक चली इस लड़ाई में प्रदेश की अलग-अलग सरकारों ने मजबूती से हिमाचल का पक्ष रखा। किसी एक सरकार को श्रेय देना ठीक नहीं जयराम ने कहा कि संबंधित राज्य बकाया चुकाने के लिए 30 साल का समय मांग रहे थे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 20 साल की समयसीमा तय की है। उन्होंने कहा कि इस जीत का श्रेय किसी एक सरकार को देना सही नहीं है। यह सभी सरकारों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
बिंदल बोले- धूमल सरकार के कार्यकाल में मिली थी पहली कानूनी जीत राजीव बिंदल ने कहा कि हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई में निर्णायक कानूनी सफलता 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली थी। उन्होंने कहा कि 1996 में सुप्रीम कोर्ट में मूल वाद दायर होने के बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली और धूमल सरकार के कार्यकाल में इस मामले को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। बिंदल ने सवाल उठाया कि जब 2011 में हिमाचल के अधिकारों को मान्यता मिल गई थी, तो 2012 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी प्रदेश को उसका पूरा बकाया क्यों नहीं मिल पाया? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों के प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मोदी सरकार के फॉर्मूले से 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी बिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से पेश कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले ने तीन दशक से अटके विवाद के समाधान का रास्ता निकाला। इसके तहत नकद भुगतान के बजाय बिजली से बकाये का निपटारा किया जाएगा। बिंदल ने मुख्यमंत्री सुक्खू से कहा कि वे इस फैसले का राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय प्रदेश की जनता को इसकी पूरी पृष्ठभूमि बताएं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और केंद्र सरकार का आभार जताया।

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