हिमाचल प्रदेश के रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक और सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल का मंगलवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने सुबह करीब 5 बजे शिमला के चमियाना स्थित अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान में अंतिम सांस ली। वह 72 वर्ष के थे। नंद लाल लंबे समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को ही चमियाना अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी और उनका कुशलक्षेम जाना था। नंद लाल के निधन की खबर से रामपुर बुशहर समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। 2007 में पहला चुनाव जीता वह रामपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक चुने गए। उन्होंने वर्ष 2007 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की। चारों बार उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। 1954 को रामपुर के देवठी में जन्म नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी में हुआ था। उनके पिता का नाम प्यारे लाल था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से वर्ष 1976 में राजनीति विज्ञान में एमए किया था। राजनीति से पहले ITBP में सेवाएं दी राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में सेवाएं दीं। वह ITBP के कमांडो दस्ते में शामिल रहे और जम्मू-कश्मीर में बटालियन की कमान भी संभाली। प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़े SPG में भी दी सेवाएं नंद लाल का सुरक्षा बलों में लंबा करियर रहा। ITBP में कमांडो के तौर पर सेवाएं देने के बाद वह प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा से जुड़े स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में भी रहे। वर्ष 1985 से 1997 तक उन्होंने इस व्यवस्था में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने एशियाई खेलों, गुटनिरपेक्ष सम्मेलन और राष्ट्रमंडल सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था में भी जिम्मेदारी निभाई। विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2007 में ITBP से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और विधानसभा चुनाव लड़ा। इसी साल वह पहली बार रामपुर से विधायक बने। इसके बाद उन्होंने लगातार तीन और चुनाव जीतकर क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी। 2013 से 2017 तक रहे मुख्य संसदीय सचिव विधायक बनने के बाद नंद लाल को सरकार और विधानसभा में कई जिम्मेदारियां मिलीं। वर्ष 2013 से 2017 तक वह मुख्य संसदीय सचिव (CPS) रहे। वर्ष 2018 से 2022 तक विधानसभा की कल्याण और ग्रामीण नियोजन समितियों से जुड़े रहे। वर्ष 2022 में चौथी बार विधायक बनने के बाद उन्हें कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया। मार्च 2024 में प्रदेश सरकार ने उन्हें सातवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। बाद में उन्हें लाडा कमेटी की अध्यक्षता की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। इस खबर को अपडेट कर रहे हैं।