हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HPPCCB) की ओर से होटलों के ‘संचालन सहमति शुल्क’ (Consent to Operate Fee) में की गई भारी बढ़ोतरी का कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने सुक्खू सरकार से इस जनविरोधी और पर्यटन-विरोधी फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘शुल्क की सरकार’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी वित्तीय विफलताओं और कुप्रबंधन का बोझ राज्य के छोटे व मध्यम कारोबारियों तथा आम जनता पर डाल रही है। जयराम ठाकुर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि शुल्क में कई गुना वृद्धि की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर बढ़ा हुआ शुल्क जमा न करवाने पर वर्षों पुराने होटल संचालकों को होटल बंद करने के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। पर्यटन कारोबार पर लगातार करों का बोझ नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सुक्खू सरकार लगातार नए शुल्क थोप रही है। उन्होंने कहा कि टॉयलेट टैक्स के बाद अब बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के वाहनों पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जा रहा है। स्कूल-कॉलेज की फीस से लेकर अस्पतालों में इलाज जैसी बुनियादी व जरूरी सेवाओं के शुल्क बढ़ा दिए गए हैं। अब प्रदेश की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन उद्योग और होटल व्यवसायियों पर भारी-भरकम सहमति शुल्क थोप दिया गया है। ग्रीन और ऑरेंज श्रेणी के होटलों पर पड़ा भारी असर पर्यटन की तुलना बड़े उद्योगों से करना गलत; इंडी गठबंधन रैली पर भी कसा तंज जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि पर्यटन व्यवसाय की तुलना बड़े औद्योगिक संस्थानों से करना पूरी तरह तर्कहीन है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारतीय जनता पार्टी इस फैसले का खुलकर विरोध करेगी और सड़कों पर उतरेगी। इसके साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी के आह्वान पर दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित हुई ‘इंडी गठबंधन’ की महारैली पर भी तंज कसते हुए उसे पूरी तरह से ‘फ्लॉप शो’ करार दिया।

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