हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शनिवार को दोपहर बाद दिल्ली रवाना हो गए। मुख्यमंत्री सुक्खू रविवार को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की ओर से आयोजित होने वाली ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली में शामिल होंगे। इस रैली में हिमाचल प्रदेश से करीब 15 हजार लोगों को ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। रैली में मुख्यमंत्री के अलावा प्रदेश सरकार के मंत्री, कांग्रेस विधायक, पार्टी पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। हिमाचल कांग्रेस की ओर से नेताओं और कार्यकर्ताओं को रविवार सुबह तक दिल्ली पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। लिहाजा ज्यादातर नेता पार्टी द्वारा हायर बसों में आज रात में राज्य के अलग अलग क्षेत्रों से दिल्ली के लिए चलेंगे। कुछ नेता अपनी निजी गाड़ियों में दिल्ली के लिए निकल चुके है। CM ने वीडियो जारी कर दिल्ली चलो की अपील की मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी एक वीडियो जारी कर प्रदेशवासियों से इस महारैली में शामिल होने की अपील की है। उनका कहना है कि वोट केवल संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि जनता की आवाज, ताकत और भविष्य का आधार है। लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए मतदान प्रक्रिया का निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय होना जरूरी है। कथित वोट चोरी, मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों इंडिया गठबंधन की यह महारैली कथित वोट चोरी, मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में आयोजित की जा रही है। कांग्रेस और विपक्षी दलों का आरोप है कि देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इससे पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। एसआईआर का विरोध दरअसल, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, अपात्र और मृत मतदाताओं के नाम हटाना तथा पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं। 13 करोड़ वोटर वाहर करने का दावा कांग्रेस का दावा है कि देशभर में 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। पार्टी इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठा रही है। उसका कहना है कि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग इस पूरे विवाद में कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी निशाने पर लिया है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है।