शिमला जिले के ठियोग स्थित पराला में हिमाचल बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) के प्रोसेसिंग प्लांट से निकलने वाले औद्योगिक वेस्ट के डिस्पोजल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाले वेस्ट को बिना उचित ट्रीटमेंट किए सीधे गिरी खड्ड में बहाया जा रहा है। इससे जल स्रोतों के दूषित होने और आसपास के क्षेत्रों में गंदगी फैल गई है। इसी दूषित जल को गिरी खड्ड से ठियोग कस्बे के लिए लिफ्ट किया जाता है। कुछ दूरी आगे से यही पानी हिमाचल की राजधानी शिमला के लिए भी लिफ्ट किया जा रहा है। इसकी भनक शुक्रवार को जब स्थानीय पंचायत जैस के प्रधान भूपेंदर हेटा को लगी तो वह स्थानीय लोगों के साथ पराला स्थित प्रोसेसिंग प्लांट पर पहुंचे। यहां उन्होंने प्लांट के एजीएम से मुलाकात कर वेस्ट के डिस्पोजल को लेकर आपत्ति जताई। पंचायत प्रधान और स्थानीय निवासी दिनेश वर्मा ने आरोप लगाया कि प्लांट से रोजाना हजारों लीटर वेस्ट निकलता है, जिसे लंबे समय से गिरी खड्ड में छोड़ दिया जाता है। इसकी गंदगी से पूरे क्षेत्र में चलना तक मुश्किल हो गया। पराला के आसपास रहने वाले लोग परेशान है। हाईकोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील भूपेंद्र हेटा ने हिमाचल हाईकोर्ट से भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह किया और कहा कि शिमला में यही पानी दर्जनों जज, ब्यूरोक्रेट, मंत्री-विधायक के साथ हजारों लोग पी रहे है। उन्होंने बताया कि HPMC प्रबंधन को एक नहीं सैकड़ों बार वेस्ट को गिरी खड्ड में नहीं डालने की चेतावनी दी जा चुकी है। उन्होंने स्थानीय जनता के साथ जल्द पराला में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। पानी का सैंपल फेल होने का भी दावा पंचायत प्रधान ने दावा किया कि ठियोग में पेयजल का सैंपल फेल पाया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि दूषित पानी के सेवन से क्षेत्र में लोग बीमार पड़ सकते है। इसलिए उन्होंने समय रहते हुए कार्रवाई की मांग की है। बदबू से आसपास के लोगों का जीना मुश्किल: दिनेश स्थानीय निवासी दिनेश वर्मा ने बताया कि पराला और इसके आसपास के क्षेत्रों में प्लांट से निकलने वाले वेस्ट के कारण दुर्गंध फैल रही है। इससे क्षेत्र में लोगों का चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया है। उन्होंने मांग की कि HPMC के पराला प्रोसेसिंग प्लांट में वेस्ट ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जांच की जाए। यह भी पता लगाया जाए कि प्लांट से निकलने वाले वेस्ट का निस्तारण निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुसार हो रहा है या नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो प्लांट के जिम्मेदार अधिकारियों और इंचार्ज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कथित कंटैमिनेशन की जांच करवाई जाए: भूपेंद्र पंचायत प्रधान भूपेंद्र हेटा ने पानी में कथित कंटैमिनेशन की जांच करवाने और प्रभावित जल स्रोतों के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच करने की भी मांग की है। साथ ही वेस्ट को बिना ट्रीटमेंट खड्ड में छोड़ने पर रोक लगाने और इसके स्थायी निस्तारण की व्यवस्था करने की मांग उठाई है। वेस्ट डिस्पोजऑफ करने को नहीं इंतजाम बता दें कि बीते साल ही पराला में सरकारी उपक्रम HPMC का प्रोसेसिंग प्लांट बनकर तैयार हुआ है। जब यह प्लांट चलता है तो उस दौरान रोजाना सैकड़ों लीटर वेस्ट निकलता है। मौके पर इसे डिस्पोज ऑफ करने की उचित व्यवस्था नहीं है, बल्कि एक गड्डे में इसे डाल दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यह गड्डा भर जाता है तो वेस्ट को नीचे नाले में छोड़ दिया जाता है।