हिमाचल प्रदेश के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। राज्य चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय शिक्षक संघ (SAMDCOT) ने सरकार के कथित भेदभावपूर्ण आदेशों और लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत 2 से 4 नवंबर तक शिक्षक रोजाना सुबह 9:30 से 11 बजे तक पेन-डाउन हड़ताल करेंगे। SAMDCOT के मुताबिक, यदि 4 नवंबर तक सरकार ने मांगों पर सकारात्मक बातचीत शुरू नहीं की या कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो 5 नवंबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर शिमला में राज्य सचिवालय तक विरोध मार्च निकाला जाएगा। संघ ने बुधवार को हुई आम सभा में आंदोलन का फैसला लिया। संघ का आरोप है कि चिकित्सा शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी की जा रही है और सेवा शर्तों में भेदभावपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। बार-बार सरकार के समक्ष समस्याएं उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकलने के कारण शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। OPD में मरीजों को करना पड़ सकता है इंतजार 2 से 4 नवंबर तक सुबह 9:30 से 11 बजे के बीच पेन-डाउन हड़ताल का असर मेडिकल कॉलेजों की नियमित सेवाओं पर पड़ सकता है। इस दौरान OPD में मरीजों की जांच, परामर्श और फॉलोअप में देरी होने की आशंका है। जिन मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लेना है, उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है। नियमित जांच और इलाज की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने शिक्षक हड़ताल में शामिल होते हैं और संबंधित मेडिकल कॉलेज मरीजों की व्यवस्था के लिए क्या वैकल्पिक इंतजाम करते हैं। संघ ने स्पष्ट किया है कि पेन-डाउन हड़ताल के दौरान आपातकालीन, ट्रॉमा और ICU सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। 5 नवंबर को बढ़ सकती है परेशानी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 4 नवंबर तक कोई ठोस पहल नहीं की, तो 5 नवंबर को प्रदेश के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के शिक्षक सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे। इस दिन शिमला में एकत्रित होकर राज्य सचिवालय तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा। यदि बड़ी संख्या में शिक्षक अवकाश पर रहते हैं, तो OPD के साथ नियमित चिकित्सकीय परामर्श, नियोजित प्रक्रियाओं और मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, संघ ने 5 नवंबर के लिए सभी नियमित सेवाओं की स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसलिए उस दिन सेवाएं कितनी प्रभावित होंगी, यह संबंधित संस्थानों की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। सरकार से विवादित आदेश वापस लेने की मांग SAMDCOT ने सरकार से विवादास्पद आदेश वापस लेने, चिकित्सा शिक्षकों की लंबित मांगों का न्यायसंगत समाधान करने और तत्काल सार्थक बातचीत शुरू करने की मांग की है। संघ का कहना है कि आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षकों के अधिकारों, सेवा शर्तों और चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था की गरिमा की रक्षा के लिए किया जा रहा है। संघ ने मरीजों को होने वाली संभावित असुविधा के लिए खेद जताते हुए कहा कि शिक्षकों ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को हमेशा प्राथमिकता दी है, लेकिन सरकार की लगातार अनदेखी के कारण आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा है। संघ के अनुसार, प्रस्तावित आंदोलन की सूचना संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। IGMC शिमला के प्रधानाचार्य को भी इसकी जानकारी दी गई है, ताकि मामला चिकित्सा शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार तक पहुंच सके। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार 4 नवंबर से पहले शिक्षकों के साथ बातचीत कर आंदोलन टालने की पहल करती है या नहीं।