यूजीसी के नए नियमों के विरोध में शिमला में प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी और राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता सचिवालय के बाहर पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। बाद में प्रदर्शनकारी सचिवालय के मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठ गए और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों ने सर्कुलर रोड पर लगाए गए बैरिकेडिंग वाले गेट को खोलते हुए सचिवालय के मुख्य द्वार तक पहुंचने की कोशिश की। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध जारी रखा। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारी सचिवालय के बाहर धरने पर बैठ गए और नियमों को वापस लेने की मांग दोहराई। मनाली से शुरू हुई विरोध यात्रा शिमला पहुंची यूजीसी के नियमों के विरोध में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में 2 अक्टूबर को मनाली से यात्रा शुरू की गई थी। यह यात्रा बुधवार को शिमला पहुंची। इसमें राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना भी शामिल हुए। यात्रा के जरिए प्रदेश में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन नियमों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उनका आरोप है कि नियमों में झूठी शिकायतों से बचाव और निष्पक्ष जांच को लेकर पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। उनका दावा है कि इससे सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शिकायतों के आधार पर आरोपी बनाए जाने का डर रहेगा। इसी आशंका के चलते वे नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देंगे, 10 जनवरी को दिल्ली जाने की तैयारी प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने यानी रोलबैक की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। इसके साथ ही 10 जनवरी को दिल्ली जाकर विरोध दर्ज कराने की योजना भी बनाई गई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यूजीसी के नियमों के विरोध में देश के अलग-अलग राज्यों में भी यात्राएं निकाली जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को इन नियमों पर पुनर्विचार करना चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें किसी भी विद्यार्थी के साथ भेदभाव न हो तथा शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। क्या हैं यूजीसी के नियम? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और भेदभाव रोकने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों में शिकायत निवारण और समान अवसर से जुड़ी व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया। हालांकि, नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षा, झूठी शिकायतों पर कार्रवाई और शिकायतों की निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन्हीं आशंकाओं के आधार पर प्रदर्शनकारी नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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