विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए। इसी के साथ पर्यटन नगरी कसौली की शांत वादियों में कल यानी 23 अक्टूबर से साहित्य, कला और विचारों की महफिल सजेगी। ऐतिहासिक कसौली क्लब में तीन दिन तक चलने वाले 15वें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, पूर्व सेना प्रमुख जनरल (डॉ.) मनोज मुकुंद नरवणे, फिल्म निर्माता इम्तियाज अली और गायक सतिंदर सरताज सहित कई जानी-मानी हस्तियां भाग लेंगी। पूरे देश की नजरें नरवणे की उस किताब (फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी) पर रहेंगी, जिसे लेकर बीते दिनों संसद में भी खूब विरोध हुआ। इस किताब में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य गतिरोध और गलवान घाटी संघर्ष के दौरान भारतीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया से संबंधित विवरण होने की खबरें सामने आई थीं। इसमें अग्निपथ योजना को लेकर हुई चर्चाओं का भी उल्लेख बताया गया। हालांकि, इस पुस्तक का प्रकाशन अभी रक्षा मंत्रालय की आवश्यक मंजूरी के कारण लटका है। राहुल गांधी ने भी फरवरी 2026 में लोकसभा में इस पुस्तक के कथित अंशों का हवाला देने की कोशिश की थी। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई थी। ऐसे में लिटफेस्ट और मीडिया से नरवणे इस बारे में बात कर सकते हैं। इस उत्सव में ऑपरेशन सिंदूर, भारत-पाक रिश्तों, राष्ट्रीय सुरक्षा और हिमालयी पर्यावरण जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने वाला है। ‘द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट’ थीम पर हो रहा लिटफेस्ट इस बार लिटफेस्ट की थीम ‘द आर्ट ऑफ डिसएग्रीमेंट’ यानी ‘असहमति की कला’ रखी गई है। यह लिटफेस्ट ऐसे समय में हो रहा है, जब राजनीतिक, सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का टकराव चर्चा में है। यह आयोजन असहमति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र में संवाद की भूमिका पर विमर्श का मंच बनेगा। तीन मंचों पर तीन दिन तक होगा विमर्श कसौली क्लब के बैडमिंटन कोर्ट, टेरेस और टेनिस लॉन में विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें लेखक, पत्रकार, कलाकार, शिक्षाविद् और अन्य विशेषज्ञ अपनी किताबों, अनुभवों और विचारों को साझा करेंगे। तीन दिवसीय आयोजन में 50 से अधिक किताबों पर चर्चा होगी। इस बार की थीम ‘असहमति की कला’ का उद्देश्य केवल अलग-अलग विचारों को सामने लाना नहीं, बल्कि मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे को सुनने और तर्क के आधार पर संवाद करने की संस्कृति को मजबूत करना है। ऐसे में साहित्यिक सत्रों के साथ राजनीतिक, सामाजिक और वैश्विक मुद्दों पर होने वाली बहसें भी महत्वपूर्ण रहेंगी। 200 किशोरों को साहित्य से जोड़ने की पहल लिटफेस्ट में नई पीढ़ी को पढ़ने और विचार-विमर्श की संस्कृति से जोड़ने के लिए भी विशेष पहल की जा रही है। इसके तहत 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 200 किशोरों को शामिल करने की योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं में पढ़ने की आदत विकसित करना, उन्हें सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना और स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने का अवसर देना है। पर्यावरण संरक्षण और बालिका शिक्षा पर खर्च होती है आय: राहुल लिटफेस्ट के संस्थापक और खुशवंत सिंह के पुत्र राहुल सिंह के अनुसार, आयोजन से होने वाली आय कसौली में पर्यावरण संरक्षण और बालिकाओं की शिक्षा पर खर्च की जाती है। कसौली उनके पिता खुशवंत सिंह के जीवन और साहित्य से गहराई से जुड़ा रहा है। उन्होंने यहां अपनी कई रचनाएं लिखीं। उनके साहित्यिक सफर और कसौली से जुड़ाव ने इस स्थान को साहित्य प्रेमियों के लिए खास पहचान दी है। 2012 में हुई थी शुरुआत, अब अंतरराष्ट्रीय पहचान खुशवंत सिंह लिटफेस्ट की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी, जब खुशवंत सिंह जीवित थे। कसौली स्थित उनके घर ‘राज विला’ का संबंध उनके साहित्यिक जीवन और चर्चित उपन्यास ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ सहित उनकी रचनात्मक यात्रा से रहा है। उनकी स्मृति में शुरू हुआ यह आयोजन अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। हाल ही में लिटफेस्ट का सातवां लंदन संस्करण और पहला ऑक्सफोर्ड संस्करण भी आयोजित किया गया।