हिमाचल में सरकारी स्कूल के लिए जमीन दान करने वाले लोग अब ‘स्कूल’ बंद होने या दूसरी पाठशाला में मर्ज होने के बाद अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं। जमीन वापसी के लिए ऐसी ही एक याचिका भी हाईकोर्ट में दायर की गई। जमीन दान करने वाले का तर्क है कि उन्होंने स्कूल के लिए जमीन दान दी थी। जब स्कूल ही बंद हो गया तो उनकी पुश्तैनी जमीन उन्हें वापस लौटाई जाए। हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग ने सभी डिप्टी डायरेक्टर को पत्र भेजकर ऐसे सभी स्कूलों की जानकारी मांगी है, जो दान की जमीन पर चल रहे है या चल रहे थे? विभाग ने इनकी विस्तृत जानकारी देने के साथ यह भी पूछा है कि क्या दान की जमीन का विभाग के नाम इंतकाल हो चुका है या नहीं? स्कूल व विभाग के पास उपलब्ध दस्तावेज भी निदेशालय भेजने को कहा गया है। शिमला में 50 साल पहले दान जमीन वापस मांगी शिक्षा निदेशालय द्वारा डिप्टी डायेरक्टरों को लिखे पत्र में हाईकोर्ट में दायर रतन सैन बनाम हिमाचल सरकार एवं अन्य मामले की याचिका का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने बीते दिनों रतन सैन मामले में जमीन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। मामला शिमला जिले के गोकासवारी गांव में सरकारी स्कूल के लिए करीब 50 वर्ष पहले दी गई जमीन से संबंधित है। जीरो एनरोलमेंट के बाद स्कूल बंद इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या शून्य होने के कारण इसे बंद कर नजदीकी पाठशाला में मर्ज कर दिया गया। याचिकाकर्ता का तर्क है कि उसके दादा ने गांव में सरकारी स्कूल चलाने के उद्देश्य से जमीन दी थी। जब स्कूल ही बंद हो गया, तो जमीन देने का मूल उद्देश्य समाप्त हो गया। हाईकोर्ट ने पाया कि सरकार के पास जमीन के हस्तांतरण का कोई पंजीकृत दानपत्र उपलब्ध नहीं था और राजस्व रिकॉर्ड में भी जमीन परिवार के नाम दर्ज थी। अदालत ने सरकार को जमीन का कब्जा मालिकों को चार सप्ताह के भीतर लौटाने का निर्देश दिया है। कितने स्कूलों की जमीन विवादों में, विभाग जुटाएगा ब्योरा शिक्षा निदेशालय ने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्कूल की जानकारी अलग-अलग निर्धारित प्रारूप में भेजी जाए, ताकि सरकार को समय रहते रिपोर्ट उपलब्ध करवाई जा सके। इस प्रक्रिया से विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि प्रदेश में कितने स्कूलों की जमीन को लेकर विवाद चल रहे हैं, कितने मामलों में जमीन मालिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और किन स्कूलों के जमीन संबंधी दस्तावेज अधूरे हैं। 1500 स्कूलों पर ताला लटकने के बाद उपजा विवाद बता दें कि हिमाचल के सभी जिलों में काफी संख्या में ऐसे सरकारी स्कूल है जिनके लिए लोगों ने जमीन दान दे रखी है। मौजूदा सुक्खू सरकार ने जीरो एनरोलमेंट और कम छात्र संख्या वाले लगभग 1500 सरकारी स्कूल बंद या मर्ज किए है। सरकार के इस फैसले के बाद लोग अपनी जमीन वापस मांग रहे हैं।