हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर नौकरी करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों की पुरानी सेवाओं को सीनियरिटी, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और पेंशन जैसे लाभों के लिए जोड़ने पर 28 नवंबर 2026 तक अंतिम निर्णय ले। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस समयसीमा के भीतर अपने पहले के आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा। जस्टिस रंजन शर्मा की अदालत ने यह निर्देश यशिका गुलेरिया की ओर से दायर कंटैम्प्ट पिटीशन का निपटारा करते हुए दिए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के पहले के आदेश के बावजूद सरकार ने अनुबंध अवधि की सेवाओं को अन्य सेवा लाभों के लिए गिनने के संबंध में जरूरी कार्रवाई नहीं की। दरअसल, हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2023 को यशिका गुलेरिया और अन्य कर्मचारियों के मामले में आदेश दिया था कि नियमित होने से पहले अनुबंध पर की गई नौकरी की अवधि को सीनियरिटी और अन्य सेवा लाभों के लिए जोड़ने के दावे पर विचार किया जाए। लेकिन इस आदेश पर कार्रवाई नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी। इस बीच शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश सेवा भर्ती एवं शर्तें अधिनियम, 2024 का हवाला देते हुए कर्मचारियों के दावों को खारिज कर दिया था। इससे मामला और उलझ गया। इसी तरह के एक अन्य मामले, देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल सरकार, में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील देवेंद्र कुमार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी थी। इसके साथ ही सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार महीने का समय दिया गया था। इस फैसले के बाद अनुबंध अवधि की सेवाओं को सेवा लाभों के लिए गिनने का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो गया। उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रही है। देवेंद्र कुमार के मामले की तर्ज पर यशिका गुलेरिया के मामले में भी समान कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है। यह मामला फिलहाल सरकार के पास विचाराधीन है। 28 नवंबर तक अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से दिए गए बयान और सुप्रीम कोर्ट में दी गई अंडरटेकिंग यानी आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। इसके बाद अदालत ने अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी। हालांकि, अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह 28 नवंबर 2026 या उससे पहले 15 दिसंबर 2023 के मूल आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करे। इस मामले का असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिन्होंने पहले अनुबंध के आधार पर नौकरी की और बाद में नियमित हुए। यदि अनुबंध अवधि को संबंधित सेवा लाभों के लिए गिनने का निर्णय होता है, तो कर्मचारियों की सीनियरिटी, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और पेंशन संबंधी पात्रता पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ सरकार के अंतिम निर्णय और लागू सेवा नियमों पर निर्भर करेगा।