शिमला में ट्रैफिक की समस्या कम करने के लिए प्रस्तावित शिमला रोपवे प्रोजेक्ट फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगा। प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रोजेक्ट पर रोक लगाने का फैसला लिया है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट के लिए जारी फाइनेंशियल बिड भी रद्द कर दी गई हैं। यह जानकारी हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल नए हलफनामे में दी गई है। चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी नेगी की बैंच के सामने सरकार ने बताया कि मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए रोपवे प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर फिलहाल आगे नहीं बढ़ा जा रहा है। प्रस्तावित रोपवे की कुल लंबाई 13.79 किलोमीटर है। इसमें तीन अलग-अलग लाइनें बनाई जानी थीं। इन पर कुल 13 बोर्डिंग और डी-बोर्डिंग स्टेशन तथा एक टर्निंग स्टेशन प्रस्तावित था। पहले सरकार इस प्रोजेक्ट को बाहरी वित्तीय सहायता से तैयार करने पर विचार कर रही थी। इसके लिए मामला परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों के पास भी भेजा गया था। पूरी तरह बंद नहीं हुआ प्रोजेक्ट सरकार ने फिलहाल अपने बजट से प्रोजेक्ट पर पैसा लगाने से कदम पीछे खींचे हैं, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है। रोपवेज एंड रैपिड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन अब ऐसा मॉडल तलाश रहा है, जिसमें सरकार पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े। इसके लिए प्रोजेक्ट को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर बनाने की संभावना देखी जा रही है। इसमें निजी कंपनियां निवेश कर सकती हैं। साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के जरिए सरकार की ओर से जरूरी वित्तीय मदद देने का विकल्प भी देखा जा रहा है। 1 दिसंबर को अगली सुनवाई सरकार के नए रुख को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका और अन्य मामलों की सुनवाई 1 दिसंबर 2026 तक टाल दी है।