धर्मशाला के सिद्धबाड़ी स्थित रक्कड़ में वन और सरकारी जमीन को कागजों में हेरफेर कर निजी बनाने और बेचने के चर्चित मामले में विजिलेंस ने शिकंजा कसा है। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के धर्मशाला थाने में मामले के एक आरोपी को बुलाया गया। अधिकारियों ने सुबह 9:30 से शाम 6:00 बजे तक करीब साढ़े आठ घंटे तक उससे सघन पूछताछ की। इस मामले में विजिलेंस ने तत्कालीन तहसीलदार, कानूनगो और पटवारी समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया है। इनमें से तत्कालीन तहसीलदार का निधन हो चुका है। विजिलेंस की जांच में सामने आया कि सरकारी जमीन को निजी हाथों में सौंपने का यह काम सोची-समझी साजिश के तहत किया गया था। ब्यूरो ने आईपीसी की धारा 420, 465, 468, 471 और 120-बी के तहत केस दर्ज किया है। एफआईआर में मुख्य रूप से तत्कालीन तहसीलदार (अब दिवंगत), तत्कालीन कानूनगो (सेवानिवृत्त), तत्कालीन पटवारी (वर्तमान में कानूनगो), मुख्य आरोपी और उसके परिवार के सदस्य, मुख्य आरोपी का तत्कालीन ड्राइवर (जीपीए धारक) और जमीन से जुड़ा अन्य मूल आवंटी पक्ष शामिल हैं। विजिलेंस जांच के अनुसार, रक्कड़ क्षेत्र में वन विभाग और हिमाचल सरकार के मालिकाना हक वाली करोड़ों रुपए की बेशकीमती सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों का उल्लंघन कर इस सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया। इसके बाद पूरी योजना के तहत जमीन को कम दामों पर मुख्य आरोपी के परिवार के नाम करवा दिया गया। जांच के घेरे में ड्राइवर क्यों आया?
एफआईआर के अनुसार, जब यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा था, तब पूछताछ के दायरे में आया यह आरोपी मुख्य आरोपी के यहां बतौर ड्राइवर काम कर रहा था। जमीन के सौदे को पूरा कराने के लिए उसने एक अन्य पक्षकार के जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) धारक के तौर पर काम किया और सेल डीड पर हस्ताक्षर किए थे। इसी सौदे के जरिए जमीन मुख्य आरोपी के परिवार के नाम दर्ज करवाई गई थी। विजिलेंस टीम ने आरोपी से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जवाब मांगे:
क्या उसे पता था कि जिस जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी उसके पास थी, वह असल में वन व सरकारी भूमि थी?
किसके कहने पर उसने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और क्या इसके बदले उसे कोई वित्तीय लाभ या कमीशन मिला था? इस बेनामी खेल में पर्दे के पीछे और कौन-कौन से लोग शामिल थे?
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान मिले बयानों का मिलान राजस्व दस्तावेजों से किया जा रहा है और जल्द ही मामले से जुड़े अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी।