हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियमों के तहत कमीशन पास कर अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारी नियमित होने के बाद अपनी शुरुआती नियुक्ति तिथि से सीनियोरिटी, ऐनुअल इंक्रीमेंट और पेंशन के लिए सेवा अवधि जोड़ने के हकदार होंगे। यह फैसला जसटिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की बैंच ने लोकेश शर्मा की याचिका स्वीकार करते हुए सुनाया है। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड, हमीरपुर के माध्यम से पूरी भर्ती प्रक्रिया के बाद 2 दिसंबर 2014 को पीजीटी के पद पर अनुबंध आधार पर हुई थी। तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद उन्हें 2 जून 2018 से नियमित किया गया। इसी दौरान जनवरी 2015 में अनुबंध आधार पर नियुक्त पीटीए-जीआईए शिक्षकों को एक अन्य अदालती आदेश के बाद सरकार ने 1 अप्रैल 2018 से नियमित कर दिया। इससे स्थिति यह बनी कि 2015 में अनुबंध पर आए कुछ जूनियर शिक्षक पहले नियमित हो गए, जबकि 2014 में मेरिट के आधार पर चयनित वरिष्ठ अनुबंध शिक्षक बाद में नियमित हुए। नियुक्ति की शुरुआती तारीख से गिनी जाएगी सेवा हाईकोर्ट ने कहा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित होकर अनुबंध पर नियुक्त कर्मचारियों की अनुबंध अवधि को क्वालीफाइंग सर्विस माना जाएगा। उन्हें 2 दिसंबर 2014 की शुरुआती नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता और सालाना इंक्रीमेंट सहित संबंधित सेवा लाभ दिए जाएंगे। पेंशन के लिए भी पात्रता तय करते समय इस सेवा अवधि को ध्यान में रखा जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने पहले से प्रमोट हो चुके जूनियर शिक्षकों के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा है। ऐसे कर्मचारियों को डिमोट नहीं किया जाएगा। लेकिन भविष्य में होने वाली पदोन्नति में संशोधित वरिष्ठता सूची के आधार पर याचिकाकर्ताओं को उनका उचित स्थान और प्राथमिकता दी जाएगी।।