हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर आज नई दिल्ली में छह राज्यों के बीच समझौता होने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होंगे। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी एमओयू समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। तय व्यवस्था के अनुसार, प्रोजेक्ट के वाटर कंपोनेंट की 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 फीसदी राशि छह राज्यों के बीच साझा होगी। 17 साल से अटकी इस परियोजना को लेकर जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में छह राज्यों के बीच सहमति बनी थी। हिमाचल की शर्तों पर बनेगा प्रोजेक्ट
समझौते में हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किया जा रहा है कि राज्य के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बदले दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के हिस्से के बिजली घटक की लागत वहन करेंगे। यानी हिमाचल को अपने आवंटित पानी के बदले परियोजना के बिजली हिस्से में आर्थिक भागीदारी का लाभ मिलेगा। हर साल 600 करोड़ की कमाई करेगा हिमाचल
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अनुसार हिमाचल इस प्रोजेक्ट पर पैसा खर्च नहीं करेगा और राज्य को इससे 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी। इससे हिमाचल को करीब 600 करोड़ रुपए सालाना की आमदनी होने की उम्मीद है। 660 मेगावाट बिजली, 1324 एमसीएम पानी का भंडारण
किशाऊ प्रोजेक्ट टौंस नदी पर प्रस्तावित है। टौंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना स्थल हिमाचल प्रदेश के सिरमौर तथा उत्तराखंड के देहरादून क्षेत्र की सीमा पर आता है। परियोजना की स्थापित बिजली क्षमता 660 मेगावाट यानी 165 मेगावाट की चार इकाइयां है। बांध से करीब 1324 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव जल भंडारण की क्षमता विकसित होगी। परियोजना से करीब 97,076 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और पेयजल/औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना के तहत करीब 236 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण प्रस्तावित है। इससे सालाना करीब 1379 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। 17 साल से अटकी परियोजना को अब आगे बढ़ने की उम्मीद
किशाऊ परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके बावजूद पानी के बंटवारे, लागत वहन और राज्यों के बीच सहमति जैसे मुद्दों के कारण यह लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पाई। जून 2026 में केंद्र की पहल पर छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद MoU का रास्ता साफ हुआ। परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि ऊपरी यमुना बेसिन में पानी का भंडारण, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाना भी है। केंद्र के अनुसार इससे यमुना के पुनर्जीवन की दिशा में भी मदद मिलेगी। हिमाचल के लिए आर्थिक और ऊर्जा दोनों लिहाज से अहम
MoU के बाद परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हिमाचल के लिए इसका महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि राज्य को परियोजना में बिजली से जुड़ा लाभ मिलेगा, जबकि उसके हिस्से के पानी का उपयोग दिल्ली और राजस्थान में किया जाएगा। किशाऊ परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली समेत ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों को पेयजल और सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा।

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