‘इंटरनेशनल लिटरेसी डे’ पर हिमाचल प्रदेश को आज दिल्ली में पूर्ण साक्षरता हासिल करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल के एजुकेशन मिनिस्टर रोहित ठाकुर इस अवार्ड को लेंगे और उन्हें विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। हिमाचल में साक्षरता दर 99.5 प्रतिशत है। देश में साक्षरता दर के मामले में हिमाचल प्रदेश गोवा के बाद दूसरे स्थान पर है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आजादी के बाद हिमाचल देश के उन राज्यों में शामिल था, जहां साक्षरता दर सबसे कम थी। आजादी के बाद सिर्फ 5 फीसदी थी साक्षरता रोहित ठाकुर ने कहा कि आजादी के समय देश की साक्षरता दर करीब 13 प्रतिशत थी, जबकि हिमाचल में यह महज 5 प्रतिशत के आसपास थी। ऐसे में कम साक्षरता वाले राज्य से लगभग पूर्ण साक्षरता तक पहुंचना हिमाचल के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे प्रदेश में लगातार शिक्षा के क्षेत्र में किए गए निवेश की अहम भूमिका रही है। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत नींव रखी। इसके बाद आने वाली सरकारों ने भी शिक्षा को प्राथमिकता दी। 1960-70 के दशक में शिक्षा पर बजट का 18-20 फीसदी खर्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद 1960 और 1970 के दशक में प्रदेश की सरकारों ने अपने बजट का 18 से 20 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया। उन्होंने कहा कि यह निवेश पंजाब और हरियाणा जैसे आर्थिक रूप से बेहतर राज्यों की तुलना में भी अधिक था। रोहित ठाकुर ने कहा कि साक्षरता अब हिमाचल के लिए बड़ी चुनौती नहीं है। इसलिए अब सरकार का ध्यान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने और सरकारी स्कूलों व कॉलेजों की कार्यप्रणाली में सुधार पर होना चाहिए। शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप कम करना जरूरी शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप को न्यूनतम करना जरूरी है। खासकर शिक्षकों के तबादलों के मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप कम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए उचित ट्रांसफर पॉलिसी और निश्चित कार्यकाल होना चाहिए। शैक्षणिक सत्र के बीच शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाने चाहिए। इसके अलावा नियमित नियुक्तियां होनी चाहिए और किसी भी तरह की बैकडोर एंट्री नहीं होनी चाहिए। 1500 स्कूल बंद, मर्ज या डाउनग्रेड करने पड़े रोहित ठाकुर ने कहा कि राज्य में कई कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ 40 से 50 रह गई है। कम छात्र संख्या के कारण सरकार को करीब 1500 स्कूलों को बंद, मर्ज या डाउनग्रेड करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि जरूरत के आधार पर होना चाहिए। जहां विद्यार्थियों की संख्या और जरूरत हो, वहीं नए शिक्षण संस्थान खोले जाने चाहिए। 15 साल में सरकारी स्कूलों से 4 लाख विद्यार्थी कम हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में सरकारी स्कूलों से करीब 4 लाख विद्यार्थी कम हुए हैं। उन्होंने इसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बचाने और उनमें विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार करने होंगे। रोहित ठाकुर ने कहा कि अब हिमाचल के सामने साक्षरता हासिल करने के बाद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सरकारी शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने की चुनौती है।