हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र के बीच बुधवार को बिजली बोर्ड के कर्मचारी और इंजीनियर मांगों को लेकर शिमला के चौड़ा मैदान में जुटे। हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी व अभियंता संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए प्रदर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से रेगुलर कर्मचारी, इंजीनियर और आउटसोर्स कर्मी पहुंचे। कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने और बिजली बोर्ड में लंबे समय से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को समायोजित करने की मांग उठाई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद अपने पहले ही कैबिनेट में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का निर्णय लिया था। इसके बाद राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ मिलना शुरू हो गया है। मगर बिजली कर्मचारियों का इंतजार पौने चार साल बाद भी खत्म नहीं हो सका। OPS की मांग को लेकर बिजली बोर्ड के कर्मचारी पहले भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हुआ। इससे गुस्साएं कर्मचारियों ने आज शिमला में प्रदर्शन किया। आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य का मुद्दा भी उठाया प्रदर्शन के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी आवाज उठाई गई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली बोर्ड में आउटसोर्स कर्मचारी 15 से 20 सालों से नाममात्र मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। आउटसोर्स कर्मी रेगुलर कर्मचारियों के समान ड्यूटी दे रहे हैं। ऐसे उनकी सेवाओं को देखते हुए आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित बनाने को पॉलिसी बननी चाहिए। वर्तमान में सरकार जब चाहे इन्हें बाहर कर देती है और अपनी मर्जी से नौकरी पर रख देती है। अब आश्वासन नहीं, फैसला चाहिए चौड़ा मैदान में हुई सभा के दौरान विभिन्न जिलों से आए कर्मचारी नेताओं ने सरकार से दोनों मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली और आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस फैसला चाहिए। इसके बाद कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए कुमार हाउस स्थित बिजली बोर्ड कार्यालय तक रैली निकाली। 44 हजार से घटकर 13 हजार कर्मचारी रहे: वर्मा कर्मचारी नेता हीरालाल वर्मा ने बताया कि बोर्ड कर्मचारियों की मांगे बहुत सारी है। मगर उनकी प्रमुख मांग ओपीएस की है। उन्होंने कहा कि ओपीएस देने में हो रही से बोर्ड कर्मचारियों में रोष है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड में यदि ओपीएस को लागू नहीं किया गया तो इसके खिलाफ लंबा आंदोलन लड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड में पहले 44 हजार कर्मचारी होते थे। अब 13 हजार कर्मचारी रह गए है। उन्होंने सरकार से बोर्ड में खाली पड़े पदों को भी भरने की मांग उठाई।