शिमला के पराला में लगभग 64 करोड़ रुपए से बनाया गया अत्याधुनिक नियंत्रित वातावरण (CA) स्टोर इस सीजन में भी सफेद हाथी बना हुआ है। 5,000 मीट्रिक टन क्षमता का यह स्टोर पिछले साल तैयार हो गया था। फिर भी इसे न 2025 और न 2026 के सेब सीजन में इस्तेमाल किया जा सका। इससे क्षेत्र के सेब बागवानों में सरकार के प्रति रोष व्याप्त है। हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HPSAMB) ने बीते साल CA स्टोर को लीज पर देने के लिए टेंडर लगाया था। इसके आधार पर एक कंपनी ने 3.36 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी, जो कि बेस प्राइस से भी कम थी। विभागीय अधिकारियों ने इसे बेस प्राइस से कम पर देने की तैयारी कर ली थी। मगर मीडिया में मामला आने के बाद इसे रोक दिया गया। इसके बाद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने टेंडर प्रक्रिया रद्द करने दोबारा से निविदाएं मांगने के निर्देश दिए थे। दूसरी बार टेंडर आमंत्रित करने में विभाग ने लगभग एक साल लगा दिया, जिससे इस सेब सीजन में भी सीए स्टोर शुरू नहीं हो सका। अब आधा सेब सीजन बीत चुका है। अब HPSAMB के निदेशक मंडल ने दोबारा से टेंडर करने का निर्णय लिया है। नैंटा बोले- जल्द जाली होगा टेंडर BOD मेंबर अक्षय नैंटा ने बताया कि टेंडर जल्द जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 5,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले स्टोर को लीज पर देने के लिए न्यूनतम कीमत के संबंध में संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि सरकार का लक्ष्य अधिकतम राजस्व हासिल करना है, साथ ही ऑपरेटर को भी नुकसान न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। उपकरणों के खराब होने और खर्च बेकार जाने का आरोप वहीं पूर्व एपीएमसी शिमला अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि करीब तीन साल पहले खरीदे गए रेफ्रिजरेटेड वैन धूल फांक रहे हैं। उनकी कीमत घट रही है। ग्रेडिंग और पैकिंग लाइन भी इस्तेमाल नहीं हो रही है। शर्मा का आरोप है कि इस परियोजना में सेब उत्पादकों के योगदान से जुटाया गया पैसा भी प्रभावी रूप से बर्बाद हो रहा है। बड़े चैंबर को लेकर भी विवाद बोर्ड सदस्य अक्षय नैंटा ने इसके लिए पूर्व सरकार और बोर्ड की प्लानिंग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि CA स्टोर के चैंबर जरूरत से ज्यादा बड़े बनाए गए हैं। जरूरत छोटे छोटे चैंबर की है। नरेश शर्मा ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि बड़े चैंबर CA स्टोर की सामान्य व्यवस्था हैं। इन्हें हर किसान के लिए अलग-अलग नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि बोर्ड ने स्टोर को समय पर चालू कर दिया होता तो सेब उत्पादकों और आढ़तियों की ओर से इसका इस्तेमाल किया जा सकता था।