विधानसभा में वंदे मातरम् के संपूर्ण गायन की मांग को लेकर भाजपा विधायक दल ने रविवार को नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में रिज मैदान स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस के खिलाफ जवाबी धरना दिया। यह धरना करीब डेढ़ घंटे तक चला, जिसमें भाजपा विधायकों के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। इस दौरान सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया गया, जिससे रिज मैदान देशभक्ति के गीतों से गूंज उठा। जयराम ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग व बलिदान का प्रतीक है। इसके सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा विधायक दल ने विधानसभा में केवल संपूर्ण वंदे मातरम् के सम्मानपूर्वक गायन की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की कार्यवाही से पहले तैयार कार्यक्रम में वंदे मातरम् का उल्लेख था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस यह तय नहीं कर सकती कि राष्ट्रगीत खंडित होकर गाया जाए। उनके अनुसार, कांग्रेस वर्किंग कमेटी का कोई फैसला देश और लोकतांत्रिक संस्थाओं से ऊपर नहीं हो सकता। राष्ट्रगान के अपमान के आरोप किए खारिज जयराम ठाकुर ने भाजपा विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्य सम्मानपूर्वक खड़े रहे और इसमें शामिल हुए। इसके बाद विपक्ष ने वंदे मातरम् के संपूर्ण गायन की मांग उठाई थी। उन्होंने बताया कि भाजपा पिछले तीन दिनों से विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो मांग रही है, लेकिन अभी तक उपलब्ध नहीं करवाया गया है। विधानसभा की पूरी कार्यवाही का वीडियो सार्वजनिक करे सरकार जयराम ने मांग की कि यदि कांग्रेस के आरोपों में सच्चाई है तो विधानसभा की पूरी कार्यवाही का वीडियो सार्वजनिक किया जाए। जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि भाजपा कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। सरकार पर जनहित के मुद्दों से बचने का आरोप उन्होंने कांग्रेस सरकार पर जनहित के मुद्दों से बचने का आरोप भी लगाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष सदन चलाना चाहता है, लेकिन सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री स्वयं नारे लगाते हुए सदन से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के सवालों का जवाब देने से बच रही है।

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