भाजपा सांसद एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। CPRI मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को भाजपा सांसदों को सर्टिफिकेट देने के बजाय अपने तीन साल से अधिक के कार्यकाल, प्रदेश की आर्थिक स्थिति और विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। कश्यप ने कहा कि भाजपा सांसद अपनी संवैधानिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों को अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने आपदा और विकास कार्यों में हिमाचल की मदद की है। कई केंद्रीय योजनाओं में प्रदेश को 90:10 के अनुपात में सहायता मिल रही है। राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के मुद्दे पर कश्यप ने कहा कि यह एक अस्थायी व्यवस्था थी। उन्होंने कांग्रेस सरकार के 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और 2030 तक देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जिस गति से कर्ज ले रही है, वह प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए चिंता का विषय है। कर्ज और खर्च को लेकर सरकार पर निशाना सुरेश कश्यप ने कहा कि सरकार को प्रदेश की आय बढ़ाने, गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाने और कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्ज लेकर प्रदेश को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है। अफसरों का कैडर नहीं, मित्रों की फौज कम करें: कश्यप आईएएस, आईपीएस और अन्य अधिकारियों के कैडर में कमी के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि सरकार को अधिकारियों की संख्या घटाने के बजाय अनावश्यक राजनीतिक नियुक्तियों और खर्चों में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को अधिकारियों का कैडर नहीं, बल्कि अपनी ‘मित्रों की फौज’ कम करनी चाहिए। भाजपा में कोई गुटबाजी नहीं कांग्रेस के भाजपा में गुटबाजी के आरोपों पर कश्यप ने कहा कि भाजपा का केवल एक गुट है और उसका नाम भारतीय जनता पार्टी है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। हिमकेयर बंद करने का विरोध हिमकेयर योजना को लेकर कश्यप ने कहा कि यह गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने कहा कि यदि योजना में गड़बड़ी हुई है तो सरकार जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे, लेकिन पूरी योजना को बंद या कमजोर न करे। कश्यप ने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय प्रदेश की अर्थव्यवस्था, कर्ज, विकास और गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

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