हिमाचल सरकार के उपक्रम एचपीएमसी ने 100 बोरी से ज्यादा सेब एमआईएस योजना के तहत देने वाले बागवानों को सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए है। इस पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोला है। भाजपा नेता एवं जुब्बल-कोटखाई से पार्टी प्रत्याशी चेतन बरागटा ने आरोप लगाया कि सरकार बागवानों को अपराधी की तरह कटघरे में खड़ा कर रही है। उन्होंने 100 से ज्यादा बोरी सेब देने वाले बागवानों को भेजे गए नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की। चेतन बरागटा ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर बागवानों की समस्याएं उठाईं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में एमआईएस के तहत करीब 45 हजार बागवानों ने सेब दिया था, जिनमें 7 हजार से अधिक बागवानों की आपूर्ति 100 बोरियों से ज्यादा थी। उन्होंने सरकार से पूछा कि इन बागवानों में से कितनों को नोटिस भेजे गए और जांच का आधार क्या है। बरागटा के अनुसार 100 से अधिक बोरी सेब देने वाले कुछ बागवानों को नोटिस भेजकर आधार कार्ड, जमाबंदी, ततीमा, राजस्व रिकॉर्ड, आढ़ती की पर्चियां और बैंक स्टेटमेंट समेत दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। साथ ही अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होने को कहा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब HPMC ने बागवानों से सेब खरीदा था, तब इन दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। उनका कहना था कि भुगतान के समय बागवानों को जांच की प्रक्रिया में उलझाना उचित नहीं है। सिर्फ बागवानों की जांच क्यों, पूरी खरीद व्यवस्था की हो जांच चेतन ने कहा कि यदि एमआईएस खरीद में गड़बड़ी की आशंका है तो जांच केवल बागवानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कलेक्शन सेंटरों पर तैनात स्टाफ, HPMC के रिकॉर्ड, परिवहन व्यवस्था और पूरी सरकारी खरीद प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। HPMC को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया बरागटा ने HPMC की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘भ्रष्टाचार का अड्डा’ तक बताया और पूरी प्रोक्योरमेंट चेन की जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एमआईएस के तहत बागवानों का ₹100 करोड़ से अधिक भुगतान लंबित है। उन्होंने सरकार से बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बागवानों का भुगतान रोककर सरकार उन पर कोई एहसान नहीं कर रही है। उनके मुताबिक यह बागवानों का हक है और सरकार को पहले उनका बकाया चुकाना चाहिए। 25% खरीद की शर्त पर भी सवाल बरागटा ने इस साल एमआईएस खरीद में 25 प्रतिशत की सीमा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौसम की मार, ओलावृष्टि और फंगल अटैक के कारण कई बागवानों की बड़ी मात्रा में फसल एमआईएस श्रेणी में आ सकती है। कलेक्शन सेंटरों पर भी सरकार को घेरा सेब सीजन शुरू होने के बावजूद कई क्षेत्रों में अधिसूचित कलेक्शन सेंटरों के पूरी तरह सक्रिय नहीं होने का आरोप लगाते हुए बरागटा ने सरकार से सभी सेंटर तत्काल शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हर कलेक्शन सेंटर का स्थान, खरीद शुरू होने की तारीख और उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। कोटखाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विरोध के बाद सेंटर बढ़ाने की बात कही गई, लेकिन बागवानों को अभी भी कई जगह खरीद व्यवस्था को लेकर स्पष्टता नहीं है। HPMC के साथ HIMFED को भी पर्याप्त खरीद केंद्र देने की मांग बरागटा ने कहा कि सरकार को HPMC और HIMFED के बीच संतुलन बनाकर खरीद व्यवस्था करनी चाहिए। उनके अनुसार बागवानों का HIMFED के साथ अच्छा अनुभव रहा है और इसीलिए दोनों संस्थाओं को पर्याप्त संख्या में कलेक्शन सेंटर दिए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष HIMFED को खरीद प्रक्रिया से लगभग बाहर कर दिया गया था।