मणिमहेश यात्रा के लिए प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है। पिछले साल जैसी भारी बारिश या भूस्खलन की स्थिति में यह मार्ग श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह रास्ता सामान्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर लंबा है, लेकिन प्रशासन के अनुसार पूरी तरह सुरक्षित है। यात्रा 25 अगस्त से शुरू होगी। इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल केवल खराब मौसम या मुख्य मार्ग के बाधित होने की स्थिति में किया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में श्रद्धालु पारंपरिक रास्ते से ही मणिमहेश यात्रा करेंगे। इसके अलावा होली और भरमौर हेलिपैड से हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए भी श्रद्धालु बाबा मणिमहेश के दर्शन कर सकेंगे। यह मार्ग वन विभाग के क्षेत्र से होकर गुजरेगा हर साल लाखों श्रद्धालु मणिमहेश यात्रा में शामिल होते हैं। पिछले वर्ष भारी बारिश और आपदा के दौरान हजारों श्रद्धालु रास्ते में फंस गए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है। यह मार्ग वन विभाग के क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इसका रूट हड़सर-घुई नाला-तोस गोठ-यमकुंड-दुनाली-धन्छौ झरना होते हुए गौरीकुंड हेलीपैड के पास मुख्य मार्ग से जुड़ेगा। व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) भरमौर विकास शर्मा ने बताया कि इस बार मणिमहेश यात्रा के दौरान प्रशासन की व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी। यात्रा के लिए 5,000 श्रद्धालुओं के स्लॉट निर्धारित किए जाएंगे। इसके अलावा, ड्रोन के माध्यम से विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं की संख्या और किसी भी स्थान पर फंसे यात्रियों की स्थिति की निगरानी की जाएगी। वैकल्पिक मार्ग को तत्काल सक्रिय किया जाएगा एडीएम शर्मा ने जानकारी दी कि पिछले वर्ष आपदा के दौरान दुनाली के पास सामान्य मार्ग को काफी नुकसान पहुंचा था। फिलहाल, श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए रास्ता तैयार कर दिया गया है, लेकिन यदि यात्रा के दौरान वहां दोबारा स्थिति खराब होती है, तो वैकल्पिक मार्ग को तत्काल सक्रिय किया जाएगा। प्रशासन आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन इस बार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। बिना पंजीकरण किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। पंजीकरण की निगरानी के लिए हड़सर में विशेष टीमें तैनात रहेंगी।

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