हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने धर्मशाला में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान विधायक सुधीर शर्मा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय, यदि किसी के पास भी भ्रष्टाचार या आय से अधिक संपत्ति से संबंधित ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें सक्षम जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या नागरिक के पास वित्तीय अनियमितता या आय से अधिक संपत्ति के साक्ष्य हैं, तो सोशल मीडिया इसके लिए सही माध्यम नहीं है। ऐसे मामलों को विजिलेंस (Vigilance), सक्षम जांच एजेंसियों या विधानसभा के पटल पर उठाया जाना चाहिए, जिससे तथ्यों के आधार पर कानूनी और निष्पक्ष कार्रवाई हो सके। मुख्यमंत्री पद की गरिमा और संवैधानिक मर्यादा का हवाला डॉ. राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ की गई कथित अभद्र टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और उसकी जनता का संवैधानिक प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली अमर्यादित भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं के बिल्कुल विपरीत है। “बच्चों जैसी बयानबाजी से नहीं बदलती सच्चाई” राजनीतिक संवाद में गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत छींटाकशी और अमर्यादित भाषा से लोकतांत्रिक मर्यादाएं कमजोर होती हैं। सोशल मीडिया पर माहौल बनाने या ‘बच्चों जैसी’ बयानबाजी करने से हकीकत नहीं बदलती। यदि कोई निर्दोष है तो जांच में सच सामने आ जाएगा और यदि किसी ने गलत किया है तो कानून अपने हिसाब से सख्त कार्रवाई करेगा।