हिमाचल हाईकोर्ट ने शादी के बाद महिलाओं की पात्रता बदलने से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी महिला अभ्यर्थी की पात्रता आवेदन की अंतिम तारीख के आधार पर तय होगी। भर्ती प्रक्रिया के दौरान शादी होने या उसके बाद परिस्थितियां बदलने से उसकी पात्रता प्रभावित नहीं होगी। जस्टिस अजय मोहन गोयल की अदालत ने यह फैसला वन मित्र भर्ती से जुड़े एक मामले में सुनाया है। यह मामला मंडी के द्रंग बीट में वन मित्र भर्ती का है। यहां सबसे अधिक मेरिट होने के बावजूद नीतू कुमारी को नौकरी नहीं दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसे कानून के खिलाफ माना और वन विभाग को नीतू कुमारी को तुरंत नियुक्ति देने के आदेश दिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी नियुक्ति बैक-डेट (15 मार्च 2025) से मानी जाए। उन्हें उसी तारीख से वेतन, वरिष्ठता और अन्य सभी सेवा लाभ दिए जाएं। शादी के कारण काट दिए थे अंक नीतू कुमारी ने 30 दिसंबर 2023 से पहले वन मित्र पद के लिए आवेदन किया था। उस समय वह अपने मायके की ग्राम पंचायत की निवासी थीं। उनका परिवार बीपीएल श्रेणी में था। उन्होंने शारीरिक दक्षता परीक्षा भी पास कर ली। दस्तावेज सत्यापन के लिए प्रथम स्थान पर बुलाया गया। मार्च 2024 में हुई नीतू की शादी इसी बीच मार्च 2024 में नीतू की शादी हो गई। इसके बाद विभाग ने यह कहते हुए उनके बीपीएल के अंक हटा दिए कि ससुराल का परिवार बीपीएल श्रेणी में नहीं है। अब वह पहले वाली ग्राम पंचायत की निवासी भी नहीं रहीं। इसके आधार पर उनकी जगह दूसरे अभ्यर्थी को नौकरी दे दी गई। हाईकोर्ट ने क्या कहा? अदालत ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन का उद्देश्य केवल यह जांचना होता है कि आवेदन के समय जमा किए गए दस्तावेज सही थे या नहीं। यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में विभाग को एक साल या उससे अधिक समय लग गया, तो इसका नुकसान अभ्यर्थी को नहीं उठाना चाहिए। शादी के बाद नौकरी से वंचित रखना उचित नहीं: कोर्ट हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो किसी अविवाहित महिला को भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक शादी न करने के लिए बाध्य करता हो। इसलिए शादी के बाद बीपीएल स्थिति या ग्राम पंचायत बदलने के आधार पर उसके अंक काटना और नौकरी से वंचित करना उचित नहीं है।

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