हिमाचल में पंचायत चुनाव के रिजल्ट घोषित होने के 63 दिन बाद भी शिमला जिला परिषद को अपना चेयरमैन और वाइस चेयरमैन नहीं मिल पाया है। सोमवार को सुबह 11 बजे प्रस्तावित चुनाव कोरम पूरा नहीं होने के कारण नहीं हो सका। कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के जिला परिषद सदस्य बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे चुनाव प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई। डीसी शिमला ने जिला परिषद के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव के लिए आज बचत भवन में सभी निर्वाचित सदस्यों की मीटिंग बुलाई थी, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के सदस्यों की गैर हाजिरी के कारण जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका। ऐसे में अब चुनाव टलना तय माना जा रहा है। बहुमत किसी के पास नहीं शिमला जिला परिषद में कुल 25 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 12, कांग्रेस के 11 और 2 निर्दलीय सदस्य हैं। चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव जीतने के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा स्थिति में किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है, जिससे दोनों निर्दलीय सदस्य सत्ता की चाबी तय करेंगे। इंडिपेंडेंट बने ‘किंगमेकर’ राजनीतिक समीकरणों के बीच दोनों निर्दलीय सदस्य निर्णायक भूमिका में आ गए हैं। चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव अब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्दलीय सदस्य किस पक्ष का समर्थन करते हैं। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल लगातार अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। सीएम सुक्खू ले सकते हैं बैठक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मंगलवार को कांग्रेस समर्थित जिला परिषद सदस्यों की बैठक ले सकते हैं। बैठक में जिला परिषद चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की जा सकती है और बहुमत जुटाने के विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है। कांग्रेस की कोशिश निर्दलीय सदस्यों का समर्थन हासिल कर जिला परिषद पर कब्जा करने की रहेगी। अब डीसी करेंगे नई तारीख घोषित चूंकि सोमवार को कोरम पूरा नहीं हो पाया, इसलिए अब डीसी शिमला चुनाव के लिए नई तारीख घोषित करेंगे। नई तिथि तय होने के बाद फिर से चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 63 दिन से नेतृत्व का इंतजार पंचायत चुनाव के परिणाम घोषित हुए करीब 63 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शिमला जिला परिषद अब तक अपना नेतृत्व नहीं चुन सकी है। बहुमत के अभाव और राजनीतिक खींचतान के कारण चुनाव लगातार अनिश्चितता में फंसा हुआ है। अब सभी की नजरें नई चुनाव तिथि और निर्दलीय सदस्यों के रुख पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि शिमला जिला परिषद की कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी।