हिमाचल सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह हरित और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इस साल 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें और 100 हाइड्रोजन बसें खरीदने की घोषणा की। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को सोलन के क्यारीघाट से HRTC की 297 नई टाइप-1 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन बसों के शामिल होने के साथ ही HRTC के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़कर 500 हो गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त सफर उपलब्ध कराएंगी। इनके संचालन से डीजल पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और HRTC के संचालन खर्च में भी बड़ी बचत होगी। सरकार ने विभिन्न डिपो में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर लिया है ताकि बसों का संचालन सुचारु रूप से हो सके। सीएम ने ‘हिमबस प्लस कार्ड’ लांच किया, 5% की छूट मिलेगी मुख्यमंत्री ने ‘हिमबस प्लस कार्ड’ भी लॉन्च किया। इस कार्ड के जरिए यात्रियों को कैशलेस और डिजिटल यात्रा की सुविधा मिलेगी। नियमित यात्रियों को किराये में 5 प्रतिशत छूट, वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत रियायत तथा HRTC सेवाओं के उपयोग के आधार पर प्रति माह अधिकतम 2,000 रुपए तक कैशबैक का लाभ मिलेगा। डीजल व्हीकल से सस्ती है इलेक्ट्रिक बसें मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों का संचालन डीजल बसों की तुलना में काफी सस्ता है। एक इलेक्ट्रिक बस पर स्टाफ समेत कुल खर्च लगभग 36 से 38 रुपए प्रति किलोमीटर आता है, जबकि डीजल बस पर 76 से 86 रुपए प्रति किलोमीटर खर्च होता है। यानी प्रत्येक किलोमीटर पर HRTC को 40 से 50 रुपये तक की बचत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार HRTC को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। 1000 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की घोषणा मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चालू वर्ष में 1000 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की जाएगी और इसके लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही सरकार 100 हाइड्रोजन बसें खरीदने पर भी विचार कर रही है, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और हिमाचल को देश का अग्रणी ग्रीन एनर्जी राज्य बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने पहले बजट में ही हिमाचल को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का विजन रखा था। वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसें एक बार चार्ज होने पर करीब 200 किलोमीटर चलती हैं, जबकि अगली पीढ़ी की बसें 250 से 300 किलोमीटर तक का सफर तय करने में सक्षम होंगी।

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