हिमाचल प्रदेश सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत जलाशयों में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध (क्लोज सीजन) के दौरान पात्र मछुआरों को प्रतिवर्ष 3,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य प्रतिबंध अवधि में मछुआरों की आजीविका को प्रभावित होने से बचाना और उनके परिवारों को आर्थिक राहत प्रदान करना है। हर वर्ष मत्स्य संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए कुछ समय के लिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है। इस अवधि में मत्स्य पालन पर निर्भर हजारों परिवारों की आय पूरी तरह रुक जाती है। इसी समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने यह योजना लागू की है। योजना का लाभ पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों से जुड़े सक्रिय मछुआरों को मिलेगा, जिनके पास वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस होगा। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र मछुआरों को संबंधित मत्स्य सहकारी समिति के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस, आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर की प्रति, वैध एनएफडीपी पंजीकरण संख्या और सहकारी समिति की सदस्यता प्रमाण-पत्र जमा करना अनिवार्य है। इस योजना से गोबिंद सागर, पौंग बांध, कोल बांध, चमेरा और रंजीत सागर जलाशयों से जुड़े लगभग 3,700 मछुआरा परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है। योजना के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ रुपये खर्च करेगी। आवेदन का सत्यापन मत्सय अधिकारी करेंगे आवेदन का सत्यापन मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, जबकि अंतिम अनुमोदन जिला स्तर पर उपनिदेशक या सहायक निदेशक मत्स्य देंगे। स्वीकृत राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से भेजी जाएगी। प्रत्येक वर्ग के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध: सुक्खू मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि मछुआरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह योजना प्रतिबंध अवधि में उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी, मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाएगी और जलीय संसाधनों के सतत संरक्षण को भी बढ़ावा देगी।

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