हिमाचल प्रदेश में कार्यरत ऐसे शिक्षकों के खिलाफ अब शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, जिन्होंने अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं की है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर (प्रारंभिक शिक्षा) को मोस्ट अर्जेंट पत्र जारी कर 15 दिन के भीतर अपने-अपने जिले में TET पास नहीं करने वाले सभी इन सर्विस टीचरों की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए है। निदेशालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के अंजुमन इशाअत-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार से एवं अन्य केस में आए आदेशों के तहत की जा रही है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि जिन शिक्षकों ने अभी तक TET पास नहीं किया, उन्हें 31 अगस्त 2028 तक अनिवार्य रूप से TET की योग्यता हासिल करनी होगी। डिप्टी डायरेक्टर को निर्देश दिए गए कि वे ऐसे सभी शिक्षकों को समय रहते परीक्षा पास करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें और उन्हें उपलब्ध प्रत्येक अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें। 15 दिन में भेजनी होगी रिपोर्ट एजुकेशन डायरेक्टर ने सभी डिप्टी डायरेक्टर को निर्देश दिए कि वे 15 दिनों के भीतर अपने जिले के TET अर्हता प्राप्त नहीं करने वाले शिक्षकों की सूची और की गई एक्शन टेकन रिपोर्ट निदेशालय को भेजें, ताकि इसे आगे राज्य सरकार को भेजा जा सके। शिक्षा बोर्ड को भी दिए निर्देश इस पत्र की प्रति हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला को भी भेजी गई है, क्योंकि शिक्षा बोर्ड को ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार- TET परीक्षा का साल में दो बार आयोजन करना है। हजारों शिक्षक हो सकते हैं प्रभावित शिक्षा विभाग के इस आदेश से प्रदेश के वे सभी कार्यरत शिक्षक प्रभावित होंगे जिन्होंने अब तक TET उत्तीर्ण नहीं किया है। विभाग अब जिला स्तर पर ऐसे शिक्षकों का पूरा डाटा तैयार कर उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करेगा। यदि निर्धारित समय सीमा तक शिक्षक TET अर्हता प्राप्त नहीं करते हैं, तो आगे सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। RTE में अनिवार्य है TET बता दें कि देश में राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट 2009 लागू होने के बाद TET पास करना अनिवार्य किया गया है। इसके तहत TET पास करने वाले शिक्षित बेरोजगारों को ही टीचर भर्ती किया जाता है। शुरू में यह व्यसव्था नई नियुक्तियों पर लागू थी। इस बीच यह मामला देश के अलग-अलग राज्यों की अदालतों में भी विचाराधीन रहा। अब महाराष्ट्र से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने TET को इन सर्विस के लिए भी अनिवार्य किया है।