राज्यस्तरीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ, शिक्षा विभाग हिमाचल ने आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को एक ज्ञापन सौंपा। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष भूट्टू राम के नेतृत्व में डीसी मंडी के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में शिक्षा विभाग के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष करने की मांग की गई है। प्रदेशाध्यक्ष भूट्टू राम ने बताया कि वर्ष 2018 में जारी एक अधिसूचना के तहत 10 मई 2001 के बाद नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष निर्धारित की गई थी। कर्मचारियों ने इस निर्णय को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने 28 मई 2024 को अपने फैसले में इस अधिसूचना को रद्द कर दिया था। न्यायालय ने कहा था कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एक समान वर्ग हैं और उनकी सेवानिवृत्ति आयु में भेदभाव नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किए गए कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा का अवसर और संबंधित वित्तीय लाभ देने के भी निर्देश दिए थे। हिमाचल सरकार ने दायर की है याचिका राज्य सरकार ने इस फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने 13 जुलाई 2026 को इस एसएलपी को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा। न्यायालय के फैसले के बाद सरकार जारी करे आदेश प्रदेशाध्यक्ष भूट्टू राम ने कहा कि न्यायालय के फैसले के बाद अब सरकार को बिना किसी देरी के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने संबंधी आदेश जारी करने चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री कर्मचारियों की इस लंबित मांग पर सकारात्मक निर्णय लेंगे और सभी विभागों में समान रूप से 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु लागू करेंगे।

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