हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो यह प्रदेश में एक साथ पीजी सीटों का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार होगा। प्रस्ताव के अनुसार, आईजीएमसी शिमला में पीजी सीटें 139 से बढ़ाकर 230 की जाएंगी। टांडा मेडिकल कॉलेज में यह संख्या 99 से 156, नेरचौक मेडिकल कॉलेज मंडी में 24 से 79, नाहन मेडिकल कॉलेज में 3 से 35, चंबा मेडिकल कॉलेज में 4 से 32 और हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में 8 से 65 करने का प्रस्ताव है। दूर होगी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सरकार का कहना है कि इस विस्तार से प्रदेश के विद्यार्थियों को राज्य में ही स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे विभिन्न विषयों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। पीजी डॉक्टर मरीजों के उपचार, चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे अस्पतालों की सेवाएं भी मजबूत होंगी। इस विस्तार को ध्यान में रखते हुए, प्रदेश सरकार पिछले तीन वर्षों में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञों के 218 नए पद भी सृजित कर चुकी है। इनमें मंडी, टांडा, नाहन, चंबा, हमीरपुर और चमियाना मेडिकल संस्थानों के पद शामिल हैं। सरकार विकसित कर रही आधुनिक जांच सुविधाएं : सीएम सुक्खू मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए आधुनिक भवन, अत्याधुनिक जांच सुविधाएं, प्रयोगशालाएं और बेहतर शिक्षण संसाधन विकसित कर रही है। उन्होंने जोर दिया कि पीजी सीटों में बढ़ोतरी से प्रदेश में अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे और लोगों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में विकसित करना है।

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