हिमाचल प्रदेश सरकार इस साल मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत सेब खरीद की व्यवस्था में बड़े बदलाव करने जा रही है। बीते साल सामने आई कथित गड़बड़ियों के बाद पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से सरकार सख्ती बरतने जा रही है। इन पर 20 जुलाई को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में अंतिम फैसला हो सकता है। दरअसल, MIS के तहत राज्य सरकार हर साल बागवानों से निम्न गुणवत्ता (C-ग्रेड) का सेब खरीदती है। इसके लिए हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाता है। C ग्रेड सेब को ओपन मार्केट में खरीददार नहीं मिल पाता। इसी मकसद से सरकार तीन दशक से MIS के तहत बागवानों से सेब लेती है। योजना में क्या 6 बड़े बदलाव किए जा रहे 1. जमीन के दस्तावेज दिखाने अनिवार्य होंगे: सेब खरीद के लिए संबंधित बागवान को अपनी जमीन के दस्तावेज दिखाने होंगे। सरकार द्वारा तैनात किए जाने वाले अधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद ही बागवानों से MIS के तहत सेब लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खरीद का लाभ केवल वास्तविक बागवानों को मिले। बीते साल कम लैंड होल्डिंग वाले बागवानों की दर्जनों बोरी सेब दिखाकर कथित भ्रष्टाचार हुआ था। इसलिए यह बदलाव किया जा रहा है। 2. नकद या पुरानी व्यवस्था खत्म, सीधे खाते में आएंगे पैसे: अब बागवानों को भुगतान पहले की तरह नहीं मिलेगा। पहले कुछ बागवानों को नकदी और कुछ को कृषि औजार इत्यादि दिए जाते थे। मगर अब बागवान को पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सीधे बैंक खातों में डाली जाएगी। बागवान के बैंक खाते की डिटेल उनसे सेब खरीद के दौरान ली जाएगी। 3. एक बागवान से अधिकतम 30 बोरी खरीदने का प्रस्ताव: बागवानी विभाग ने सुझाव दिया है कि एक बागवान से अधिकतम 30 बोरी सेब ही खरीदा जाए। पहले कई मामलों में 50, 100 या इससे अधिक बोरियां खरीदी जाती थीं। हालांकि 30 बोरी की सीमा पर अंतिम फैसला 20 जुलाई की कैबिनेट बैठक में होगा और इसमें बदलाव भी संभव है। 4. खरीद केंद्र घटेंगे, निगरानी बढ़ेगी: अब पूरे प्रदेश में पहले की तरह करीब 250 खरीद केंद्र नहीं होंगे। सूत्रों के अनुसार- सरकार जरूरत के अनुसार- सेब खरीद केंद्र खोलेगी और इनकी संख्या 100 से कम रह सकती है। 5. हर खरीद केंद्र पर अधिकारी तैनात होगा: हर खरीद केंद्र पर एक अधिकारी की तैनाती होगी, जो MIS योजना की निगरानी करेंगे। पूर्व में अधिकांश खरीद केंद्र को आउटसोर्स व्यवस्था के सहारे छोड़ दिया जाता था। इससे कई खरीद केंद्र दो गुणा ज्यादा सेब की खरीद को दर्शाकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे देते थे। 6. CCTV की निगरानी में खरीद होगी: बीते साल की गड़बड़ियों के बाद सरकार ने CCTV कैमरों की निगरानी में सेब खरीद का निर्णय लिया है। प्रत्येक खरीद केंद्र पर CCTV कैमरा लगाने प्रस्तावित है। पूर्व में इसकी व्यवस्था नहीं थी। पराला बनेगा सबसे बड़ा खरीद केंद्र इस बार शिमला जिला के ठियोग की पराला मंडी में सबसे बड़ा सेब खरीद केंद्र खोला जाएगा। यहां पहले कभी खरीद केंद्र नहीं खोला गया। पराला और आसपास के क्षेत्रों के बागवानों को अपना सेब स्वयं खरीद केंद्र तक लाना होगा। इसके बाद खरीदा गया सेब यहीं स्थापित प्रोसेसिंग प्लांट में भेजा जाएगा। क्यों किए जा रहे हैं ये बदलाव? बीते साल HPMC ने MIS के तहत रिकॉर्ड 100 मीट्रिक टन से अधिक सेब खरीदा था। लेकिन खरीद के बाद बड़ी मात्रा में सेब सड़क किनारे खराब हो गया। इसकी वजह मानसून और खराब सड़कों को बताया गया था। इसके अलावा सरकार को खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के प्रमाण भी मिले। कुछ मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई। पारदर्शिता लाने को कई बदलाव प्रस्तावित: पालरासू हॉर्टिकल्चर सेक्रेटरी सी. पालरासू ने बताया कि योजना में पारदर्शिता लाने के लिए कई बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन पर अंतिम फैसला कैबिनेट में होगा। योजना में बदलाव का मकसद खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

Spread the love